राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) – अनुच्छेद 338A, संरचना, शक्तियाँ और भूमिका | Indian Polity Notes

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग भारत में अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) के संवैधानिक संरक्षण, अधिकारों की रक्षा और सामाजिक-आर्थिक विकास की निगरानी करने वाला एक महत्वपूर्ण संवैधानिक निकाय है। अनुसूचित जनजातियाँ देश की जनसंख्या का एक विशिष्ट और संवेदनशील वर्ग हैं, जिनकी पहचान भौगोलिक अलगाव, सांस्कृतिक विशिष्टता और ऐतिहासिक वंचना से जुड़ी रही है। इन्हीं विशेष परिस्थितियों के कारण उनके लिए अलग संवैधानिक निगरानी तंत्र की आवश्यकता महसूस की गई।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338A के अंतर्गत राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की स्थापना की गई, जिसे 89वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा स्वतंत्र संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया। इससे पूर्व अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए एक संयुक्त आयोग था, लेकिन दोनों वर्गों की समस्याओं की प्रकृति अलग होने के कारण उन्हें पृथक आयोगों में विभाजित किया गया। NCST का प्रमुख कार्य अनुसूचित जनजातियों से संबंधित संवैधानिक एवं वैधानिक प्रावधानों के क्रियान्वयन की निगरानी, शिकायतों की जाँच, तथा सरकार को नीतिगत सलाह देना है।

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग भारत में अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) के संवैधानिक संरक्षण, अधिकारों की रक्षा और समावेशी विकास की निगरानी के लिए गठित एक महत्वपूर्ण संवैधानिक निकाय है। अनुसूचित जनजातियाँ सामाजिक-सांस्कृतिक विशिष्टताओं, भौगोलिक अलगाव और ऐतिहासिक वंचना के कारण विशेष संरक्षण की आवश्यकता रखती हैं। इन्हीं आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए संविधान ने उनके लिए पृथक आयोग की व्यवस्था की।


1️⃣ संवैधानिक आधार और विकास

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का संवैधानिक आधार अनुच्छेद 338A है।
प्रारंभ में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए संयुक्त आयोग था, लेकिन दोनों वर्गों की समस्याओं की प्रकृति भिन्न होने के कारण 89वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा उन्हें अलग-अलग आयोगों में विभाजित किया गया:

  • अनुसूचित जाति आयोग → अनुच्छेद 338
  • अनुसूचित जनजाति आयोग → अनुच्छेद 338A

यह विभाजन जनजातीय मुद्दों—जैसे भूमि अधिकार, वन संसाधन, विस्थापन, स्वशासन—पर विशेष ध्यान देने के उद्देश्य से किया गया।


2️⃣ आयोग की संरचना (Composition)

अनुच्छेद 338A के अनुसार, NCST में शामिल हैं:

  • एक अध्यक्ष (Chairperson)
  • एक उपाध्यक्ष (Vice-Chairperson)
  • तीन अन्य सदस्य

इन सभी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
आयोग के सदस्यों का कार्यकाल, सेवा शर्तें और पात्रता राष्ट्रपति द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार निर्धारित होती हैं।

📌 Exam Fact:

संरचना संविधान में निर्धारित है, जबकि सेवा शर्तें कार्यपालिका द्वारा नियमों से तय होती हैं।


3️⃣ आयोग की शक्तियाँ (Powers)

NCST को नागरिक न्यायालय जैसी जाँच शक्तियाँ प्राप्त हैं, जैसे:

  • व्यक्तियों को तलब करना
  • दस्तावेज़ मंगाना
  • साक्ष्य लेना
  • शपथ पर बयान लेना

हालाँकि:

  • आयोग दंड नहीं दे सकता
  • इसकी सिफारिशें बाध्यकारी नहीं होतीं

👉 इसकी भूमिका जाँच, निगरानी और सलाहकारी है।


4️⃣ आयोग के कार्य (Functions)

अनुच्छेद 338A(5) में आयोग के प्रमुख कार्य वर्णित हैं:

🔹 (1) संवैधानिक एवं वैधानिक सुरक्षा की निगरानी

अनुसूचित जनजातियों से संबंधित:

  • संवैधानिक प्रावधान
  • कानून
  • सरकारी नीतियाँ
    के क्रियान्वयन की निगरानी

🔹 (2) शिकायतों की जाँच

ST व्यक्तियों/समुदायों से जुड़ी:

  • अधिकारों के उल्लंघन
  • भेदभाव
  • भूमि, वन और पुनर्वास से जुड़े मामलों
    की जाँच

🔹 (3) सामाजिक-आर्थिक विकास का मूल्यांकन

  • जनजातीय कल्याण योजनाओं
  • शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका कार्यक्रमों
    के प्रभाव का आकलन

🔹 (4) नीतिगत सलाह

  • केंद्र और राज्य सरकारों को
  • जनजातीय विकास, संरक्षण और सशक्तीकरण पर सुझाव

🔹 (5) रिपोर्ट प्रस्तुत करना

  • वार्षिक रिपोर्ट
  • विशेष रिपोर्ट राष्ट्रपति को

राष्ट्रपति इन रिपोर्टों को संसद के दोनों सदनों में प्रस्तुत करते हैं।


5️⃣ आयोग की रिपोर्टें (Reports)

NCST की रिपोर्टें:

  • जनजातीय क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति उजागर करती हैं
  • नीतिगत कमियों की पहचान करती हैं
  • सुधारों का रोडमैप देती हैं

लेकिन:

  • ये रिपोर्टें कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं
  • सरकार केवल Action Taken Report (ATR) प्रस्तुत करती है

6️⃣ पाँचवीं और छठी अनुसूची से संबंध (5th & 6th Schedule Link)

NCST का एक विशिष्ट और महत्वपूर्ण दायित्व है—जनजातीय क्षेत्रों के संवैधानिक संरक्षण की निगरानी।

🔸 पाँचवीं अनुसूची

  • अनुसूचित क्षेत्रों और जनजातीय प्रशासन
  • राज्यपाल की विशेष शक्तियाँ
  • आदिवासी सलाहकार परिषद (TAC)

🔸 छठी अनुसूची

  • पूर्वोत्तर राज्यों में स्वायत्त जिला परिषदें
  • जनजातीय स्वशासन और सांस्कृतिक संरक्षण

📌 Mains Line:

NCST acts as a constitutional bridge between tribal governance under the Fifth and Sixth Schedules and the Union–State administration.


7️⃣ आयोग का महत्व (Significance)

NCST:

  • जनजातीय समुदायों की संवैधानिक आवाज़ है
  • भूमि-वन-संस्कृति संरक्षण का संस्थागत मंच है
  • समावेशी विकास और जनजातीय स्वशासन को बढ़ावा देता है

8️⃣ प्रमुख चुनौतियाँ और मुद्दे (Issues & Challenges)

🔴 (1) सिफारिशों की सीमित प्रभावशीलता

  • बाध्यकारी न होने से अनुपालन कमजोर

🔴 (2) भूमि और वन अधिकारों पर संघर्ष

  • खनन, परियोजनाएँ, विस्थापन

🔴 (3) संसाधन और स्टाफ की कमी

  • शिकायतों का बोझ अधिक

🔴 (4) समन्वय की कमी

  • राज्यों और जिला प्रशासन के साथ तालमेल कमजोर

9️⃣ सुधार की आवश्यकता (Way Forward)

  • सिफारिशों के अनुपालन को मजबूत करना
  • भूमि-वन अधिकार मामलों में त्वरित हस्तक्षेप
  • डिजिटल शिकायत और ट्रैकिंग प्रणाली
  • राज्यों के जनजातीय विभागों से बेहतर समन्वय

निष्कर्ष

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग भारतीय संविधान के सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक संरक्षण दर्शन का एक केंद्रीय स्तंभ है। 5वीं और 6वीं अनुसूची से जुड़ा इसका कार्य इसे अन्य संवैधानिक संस्थाओं से अलग बनाता है। यदि इसकी सिफारिशों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, तो यह जनजातीय समुदायों के लिए वास्तविक परिवर्तनकारी संस्था सिद्ध हो सकता है।


🧾 NCSC vs NCST

आधारNCSCNCST
संवैधानिक अनुच्छेद338338A
संबंधित वर्गअनुसूचित जातियाँअनुसूचित जनजातियाँ
फोकससामाजिक भेदभाव, अत्याचारभूमि, वन, संस्कृति
विशेष अनुसूचियाँ5वीं, 6वीं
प्रमुख मुद्देआरक्षण, सामाजिक न्यायविस्थापन, स्वशासन
रिपोर्ट किसेराष्ट्रपतिराष्ट्रपति

📌 Prelims Trap:

Article 338 = SC, Article 338A = ST

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