भारतीय संविधान एक लचीला लेकिन मजबूत संघीय ढांचा प्रदान करता है। भारत की भौगोलिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विविधता को ध्यान में रखते हुए संविधान निर्माताओं ने यह स्वीकार किया कि सभी राज्यों पर एक समान प्रशासनिक व्यवस्था लागू करना व्यावहारिक नहीं होगा। इसी विचार से संविधान में कुछ राज्यों के लिए विशेष प्रावधान (Special Provisions) किए गए।
ये विशेष प्रावधान मुख्य रूप से अनुच्छेद 371 से 371J के अंतर्गत आते हैं। इनका उद्देश्य राष्ट्रीय एकता को बनाए रखते हुए क्षेत्रीय आकांक्षाओं, जनजातीय पहचान, सामाजिक परंपराओं और क्षेत्रीय असंतुलन की रक्षा करना है।
यह अध्याय UPSC, State PCS और SSC जैसी परीक्षाओं में सीधे और घुमाकर पूछे जाने वाले प्रश्नों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
🧠 संवैधानिक दर्शन: Asymmetrical Federalism
भारत में संघीय व्यवस्था Symmetrical नहीं बल्कि Asymmetrical Federalism पर आधारित है।
अर्थात् कुछ राज्यों को उनकी विशिष्ट परिस्थितियों के कारण अतिरिक्त संवैधानिक संरक्षण दिया गया है। यह विशेष दर्जा अलगाव नहीं बल्कि एकीकरण (Integration) का माध्यम है।
🔹 अनुच्छेद 371 – महाराष्ट्र और गुजरात
इस अनुच्छेद के अंतर्गत राष्ट्रपति को यह शक्ति दी गई है कि वे:
- महाराष्ट्र में विदर्भ, मराठवाड़ा और शेष महाराष्ट्र
- गुजरात में सौराष्ट्र, कच्छ और अन्य पिछड़े क्षेत्रों
के लिए अलग विकास बोर्ड की स्थापना का निर्देश दे सकें।
📌 उद्देश्य:
- क्षेत्रीय असंतुलन को कम करना
- समान विकास सुनिश्चित करना
🔹 अनुच्छेद 371A – नागालैंड
यह अनुच्छेद सबसे अधिक स्वायत्तता प्रदान करता है।
मुख्य विशेषताएँ:
- नागा सामाजिक और धार्मिक प्रथाएँ
- प्रथागत कानून
- भूमि और प्राकृतिक संसाधन
इन विषयों पर संसद का कोई भी कानून तभी लागू होगा जब नागालैंड विधानसभा सहमति दे।
इसके अतिरिक्त:
- राज्यपाल को कानून-व्यवस्था पर विशेष दायित्व सौंपा गया है।
📌 परीक्षा तथ्य:
👉 विधानसभा की सहमति = 371A और 371G
🔹 अनुच्छेद 371B – असम
- असम विधानसभा में जनजातीय क्षेत्रों के लिए एक विशेष समिति का गठन।
- यह समिति जनजातीय हितों से जुड़े मामलों पर विचार करती है।
📌 उद्देश्य:
- जनजातीय क्षेत्रों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना।
🔹 अनुच्छेद 371C – मणिपुर
- मणिपुर में हिल एरिया कमेटी (Hill Areas Committee) का गठन।
- राज्यपाल को इन क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित विशेष रिपोर्ट राष्ट्रपति को भेजने की शक्ति।
📌 परीक्षा ट्रैप:
👉 Hill Areas Committee = केवल मणिपुर
🔹 अनुच्छेद 371D और 371E – आंध्र प्रदेश / तेलंगाना
🔸 अनुच्छेद 371D
- शिक्षा और सरकारी नौकरियों में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता।
- प्रशासनिक ट्रिब्यूनल की व्यवस्था।
🔸 अनुच्छेद 371E
- केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना का प्रावधान।
📌 उद्देश्य:
- क्षेत्रीय असंतुलन को कम करना।
🔹 अनुच्छेद 371F – सिक्किम
सिक्किम 1975 में भारत में शामिल हुआ। इस अनुच्छेद के तहत:
- सिक्किम विधानसभा की संरचना को संरक्षण
- पुराने कानून तब तक लागू रहेंगे जब तक बदले न जाएँ
- भूमि अधिकारों की विशेष सुरक्षा
📌 परीक्षा तथ्य:
👉 371F = सिक्किम की संवैधानिक पहचान की रक्षा
🔹 अनुच्छेद 371G – मिजोरम
- धार्मिक और सामाजिक प्रथाओं
- प्रथागत कानून
- भूमि संसाधन
इन विषयों पर संसद का कानून तभी लागू होगा जब मिजोरम विधानसभा सहमति दे।
📌 371A (नागालैंड) जैसा ही प्रावधान।
🔹 अनुच्छेद 371H – अरुणाचल प्रदेश
- राज्यपाल को कानून-व्यवस्था पर विशेष विवेकाधिकार।
- यह शक्ति राष्ट्रपति के निर्देशों के अनुसार प्रयोग की जाती है।
📌 Governor discretionary power = 371H
🔹 अनुच्छेद 371I – गोवा
- गोवा विधानसभा के सदस्यों की न्यूनतम संख्या 30 निर्धारित।
📌 छोटा लेकिन सीधे पूछे जाने योग्य तथ्य।
🔹 अनुच्छेद 371J – कर्नाटक (कल्याण-कर्नाटक क्षेत्र)
- हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र के लिए:
- अलग विकास बोर्ड
- शिक्षा और रोजगार में आरक्षण
📌 2012 में जोड़ा गया
📌 सबसे नया विशेष प्रावधान
🧾 Quick Revision Table
| अनुच्छेद | राज्य | प्रमुख विशेषता |
|---|---|---|
| 371 | महाराष्ट्र, गुजरात | क्षेत्रीय विकास बोर्ड |
| 371A | नागालैंड | विधानसभा सहमति |
| 371B | असम | जनजातीय समिति |
| 371C | मणिपुर | हिल एरिया कमेटी |
| 371D | AP/TS | स्थानीय आरक्षण |
| 371F | सिक्किम | पुराने कानूनों की सुरक्षा |
| 371G | मिजोरम | संसद कानून पर प्रतिबंध |
| 371H | अरुणाचल | Governor special power |
| 371I | गोवा | न्यूनतम 30 विधायक |
| 371J | कर्नाटक | क्षेत्रीय आरक्षण |
निष्कर्ष
कुछ राज्यों के लिए विशेष प्रावधान भारतीय संघवाद की लचीलापन और व्यावहारिकता को दर्शाते हैं। ये प्रावधान अलगाव नहीं बल्कि राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का माध्यम हैं। UPSC और State PCS में यह अध्याय कम शब्दों में अधिक अंक दिलाने वाला माना जाता है।
❓ Frequently Asked Questions (FAQs)
1. भारतीय संविधान में कुछ राज्यों के लिए विशेष प्रावधान क्यों किए गए हैं?
भारत की सामाजिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और भौगोलिक विविधता को ध्यान में रखते हुए कुछ राज्यों को विशेष संवैधानिक प्रावधान दिए गए हैं, ताकि राष्ट्रीय एकता बनाए रखते हुए क्षेत्रीय आवश्यकताओं की रक्षा की जा सके।
2. कुछ राज्यों के लिए विशेष प्रावधान संविधान के किस भाग में दिए गए हैं?
ये विशेष प्रावधान मुख्य रूप से अनुच्छेद 371 से 371J के अंतर्गत दिए गए हैं।
3. किस अनुच्छेद के अंतर्गत संसद का कानून राज्य विधानसभा की सहमति से ही लागू होता है?
अनुच्छेद 371A (नागालैंड) और 371G (मिजोरम) के अंतर्गत कुछ विषयों पर संसद का कानून तभी लागू होता है जब संबंधित राज्य विधानसभा सहमति दे।
4. किस राज्य में हिल एरिया कमेटी (Hill Areas Committee) का प्रावधान है?
मणिपुर में, अनुच्छेद 371C के अंतर्गत हिल एरिया कमेटी का प्रावधान किया गया है।
5. किस अनुच्छेद के तहत राज्यपाल को कानून-व्यवस्था पर विशेष विवेकाधिकार दिया गया है?
अनुच्छेद 371H के अंतर्गत अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल को कानून-व्यवस्था पर विशेष विवेकाधिकार दिया गया है।
6. क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने के लिए कौन-कौन से अनुच्छेद लाए गए?
अनुच्छेद 371, 371D और 371J का उद्देश्य क्षेत्रीय विकास और असंतुलन को कम करना है।
7. सबसे नया विशेष प्रावधान कौन सा है और किस राज्य से संबंधित है?
अनुच्छेद 371J सबसे नया विशेष प्रावधान है, जो कर्नाटक के कल्याण-कर्नाटक (हैदराबाद-कर्नाटक) क्षेत्र से संबंधित है।
8. सिक्किम से संबंधित विशेष प्रावधान कौन सा है?
अनुच्छेद 371F सिक्किम से संबंधित है, जो उसकी विधानसभा संरचना, पुराने कानूनों और भूमि अधिकारों की रक्षा करता है।
9. गोवा के लिए विशेष प्रावधान क्या है?
अनुच्छेद 371I के अनुसार गोवा विधानसभा के सदस्यों की न्यूनतम संख्या 30 निर्धारित की गई है।
10. UPSC और State PCS परीक्षाओं के लिए यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है?
यह अध्याय fact-based, exception-oriented और direct question prone है। प्रीलिम्स में सीधे प्रश्न और मेन्स में संघवाद (Federalism) से जुड़े उत्तरों में इसका उपयोग किया जाता है।
क्या आप इन नोट्स को ऑफलाइन पढ़ना चाहते हैं?
📄 डाउनलोड करें (Click here)(“ऐसे ही और शानदार PDF नोट्स के लिए हमारे टेलीग्राम चैनल से अभी जुड़ें!”)