विभाजन और भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 (Partition of India & Indian Independence Act, 1947)

15 अगस्त 1947 भारत के इतिहास का सबसे गौरवपूर्ण और सबसे दर्दनाक दिन था।
एक ओर भारत ने सदियों की विदेशी गुलामी से मुक्ति पाई, वहीं दूसरी ओर भारत-पाक विभाजन ने उपमहाद्वीप को गहरे घाव दिए।
इस ऐतिहासिक परिवर्तन का कानूनी आधार था—भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947

📌 यह अध्याय बताता है कि
👉 स्वतंत्रता और विभाजन एक साथ क्यों आए और उनका भारत पर क्या प्रभाव पड़ा


भारत का विभाजन (Partition of India)

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विभाजन से तात्पर्य

1947 में ब्रिटिश भारत को—

  • भारत (India)
  • पाकिस्तान (Pakistan)

दो स्वतंत्र राष्ट्रों में विभाजित किया गया।


विभाजन के प्रमुख कारण

1️⃣ साम्प्रदायिक राजनीति का उदय

  • अलग निर्वाचन मंडल (1909 से)
  • मुस्लिम लीग की अलग राष्ट्र की माँग

2️⃣ कैबिनेट मिशन की विफलता

  • कांग्रेस–लीग समझौते का अभाव
  • समूह व्यवस्था पर मतभेद

3️⃣ डायरेक्ट एक्शन डे (1946)

  • सांप्रदायिक हिंसा
  • प्रशासनिक नियंत्रण विफल

4️⃣ ब्रिटिश नीति और जल्दबाज़ी

  • सत्ता हस्तांतरण में शीघ्रता
  • प्रशासनिक शून्य का भय

📌 विभाजन
👉 राजनीतिक असहमति और औपनिवेशिक नीति का परिणाम था।


विभाजन की प्रक्रिया

माउंटबेटन योजना (3 जून 1947)

  • भारत और पाकिस्तान का निर्माण
  • पंजाब और बंगाल का विभाजन
  • रेडक्लिफ़ आयोग द्वारा सीमा निर्धारण

📌 रेडक्लिफ़ रेखा की घोषणा स्वतंत्रता के बाद की गई, जिससे अराजकता फैली।


मानवीय त्रासदी

प्रभाव

  • लगभग 1.5 करोड़ लोग विस्थापित
  • 10–15 लाख लोगों की मृत्यु
  • महिलाओं पर अत्याचार
  • परिवार और समाज टूटे

📌 यह
👉 20वीं सदी का सबसे बड़ा मानव विस्थापन था।


भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947

अधिनियम की पृष्ठभूमि

  • माउंटबेटन योजना को वैधानिक रूप
  • ब्रिटिश संसद द्वारा पारित
  • 18 जुलाई 1947 को स्वीकृत

भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम के प्रमुख प्रावधान

1️⃣ दो डोमिनियन का निर्माण

  • भारत और पाकिस्तान
  • 15 अगस्त 1947 से प्रभावी

2️⃣ ब्रिटिश सर्वोच्चता का अंत

  • ब्रिटिश संसद का अधिकार समाप्त
  • भारत पूर्ण रूप से स्वतंत्र

3️⃣ गवर्नर-जनरल की व्यवस्था

  • भारत: लॉर्ड माउंटबेटन
  • पाकिस्तान: मुहम्मद अली जिन्ना

4️⃣ संविधान सभा को संप्रभुता

  • संविधान निर्माण का पूर्ण अधिकार

5️⃣ रियासतों की स्थिति

  • ब्रिटिश अधिपत्य समाप्त
  • भारत या पाकिस्तान में विलय का विकल्प

📌 इस अधिनियम ने
👉 भारत को विधिक रूप से स्वतंत्र बनाया


स्वतंत्रता के बाद तात्कालिक चुनौतियाँ

प्रशासनिक

  • विभाजित प्रशासन
  • संपत्ति और सेना का बँटवारा

सामाजिक

  • शरणार्थी पुनर्वास
  • साम्प्रदायिक सौहार्द की पुनर्स्थापना

राजनीतिक

  • संविधान निर्माण
  • लोकतांत्रिक ढाँचे की स्थापना

ऐतिहासिक महत्व

विभाजन का महत्व

  • उपमहाद्वीप का पुनर्गठन
  • दीर्घकालिक भारत–पाक तनाव

स्वतंत्रता अधिनियम का महत्व

  • औपनिवेशिक शासन का अंत
  • भारतीय संप्रभुता की स्थापना
  • संविधान सभा को सर्वोच्चता

📌 यह अधिनियम
👉 ब्रिटिश शासन की अंतिम औपचारिक विदाई था।


परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य

✔ भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम – 18 जुलाई 1947
✔ स्वतंत्रता दिवस – 15 अगस्त 1947
✔ रैडक्लिफ़ आयोग – सीमा निर्धारण
✔ अंतिम वायसराय – लॉर्ड माउंटबेटन
✔ पाकिस्तान के गवर्नर-जनरल – जिन्ना


निष्कर्ष (Conclusion)

विभाजन और भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम
👉 भारतीय इतिहास के निर्णायक अध्याय हैं।

जहाँ स्वतंत्रता ने भारत को

  • आत्मनिर्णय
  • संप्रभुता
  • लोकतंत्र

दिया, वहीं विभाजन ने

  • मानवीय पीड़ा
  • स्थायी भू-राजनीतिक चुनौतियाँ

छोड़ीं।

“15 अगस्त 1947—आज़ादी का उत्सव और इतिहास का सबसे बड़ा बलिदान।”


FAQs (Frequently Asked Questions)

Q1. भारत का विभाजन क्यों हुआ?

साम्प्रदायिक राजनीति, कांग्रेस–लीग मतभेद और ब्रिटिश जल्दबाज़ी के कारण।

Q2. भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम कब पारित हुआ?

18 जुलाई 1947।

Q3. रैडक्लिफ़ रेखा क्या थी?

भारत–पाक सीमा निर्धारण की रेखा।

Q4. स्वतंत्रता अधिनियम का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान क्या था?

ब्रिटिश सर्वोच्चता का अंत और भारत की संप्रभुता।

Q5. विभाजन का सबसे बड़ा प्रभाव क्या था?

भीषण मानव विस्थापन और साम्प्रदायिक हिंसा।

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