संघ एवं उसका राज्य क्षेत्र (अनुच्छेद 1–4) | नए राज्यों का गठन, आयोग व नोट्स (UPSC/SSC/PCS)

संघ एवं उसका राज्य क्षेत्र क्या है?
संघ एवं इसका राज्य क्षेत्र भारतीय संविधान के भाग 1 (अनुच्छेद 1 से 4) में वर्णित है। संघ एवं इसका राज्य क्षेत्र भारत की भौगोलिक सीमाओं, राज्यों के निर्माण और संसद की शक्तियों को स्पष्ट करता है। यह अध्याय बताता है कि भारत ‘राज्यों का संघ’ है और संसद को राज्यों की सीमा, नाम और क्षेत्र बदलने की व्यापक शक्ति प्राप्त है।

संघ एवं इसका राज्य क्षेत्र (अनुच्छेद 1–4)

संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 1 से 4 (Constitutional Provisions)

भारतीय संविधान का भाग-1 (अनुच्छेद 1 से 4) संघ और उसके राज्य क्षेत्रों की कानूनी मर्यादा और संसद की असीमित शक्ति को परिभाषित करता है।

अनुच्छेद 1: भारत का नाम और संघ का प्रकार

  • परिभाषा: “भारत, अर्थात इंडिया, राज्यों का संघ (Union of States) होगा।”
  • राज्यों का संघ (Union of States): डॉ. अंबेडकर के अनुसार इसके दो अर्थ हैं:
    1. भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी ‘समझौते’ का परिणाम नहीं है।
    2. किसी भी राज्य को संघ से अलग होने का अधिकार नहीं है।
  • क्षेत्रों का वर्गीकरण: अनुच्छेद 1 भारत के राज्य क्षेत्र को तीन श्रेणियों में बांटता है:
    • (a) राज्यों के क्षेत्र (28 राज्य)
    • (b) संघ राज्य क्षेत्र (8 UTs)
    • (c) ऐसे क्षेत्र जिन्हें भारत सरकार भविष्य में अधिग्रहित (Acquire) कर सकती है।

अनुच्छेद 2: नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना

यह अनुच्छेद संसद को उन राज्यों को भारतीय संघ में शामिल करने की शक्ति देता है जो पहले से भारत का हिस्सा नहीं हैं

  • उदाहरण: सिक्किम का विलय (1975) अनुच्छेद 2 के तहत किया गया था।
  • यह मुख्य रूप से बाहरी क्षेत्रों के अधिग्रहण से संबंधित है।

अनुच्छेद 3: राज्यों का आंतरिक पुनर्गठन

यह संसद को भारत के वर्तमान राज्यों के भूगोल को बदलने की शक्ति देता है। संसद साधारण बहुमत से:

  • किसी राज्य का क्षेत्र बढ़ा सकती है या घटा सकती है।
  • किसी राज्य की सीमाओं (Boundaries) में परिवर्तन कर सकती है।
  • किसी राज्य का नाम बदल सकती है (जैसे उड़ीसा से ओडिशा)।
  • शर्त: इसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश आवश्यक है और संबंधित राज्य की राय मांगी जाती है (हालाँकि वह राय बाध्यकारी नहीं है)।

अनुच्छेद 4: प्रक्रियात्मक सरलता

अनुच्छेद 4 घोषणा करता है कि अनुच्छेद 2 और 3 के तहत बनाए गए कानून अनुच्छेद 368 के तहत ‘संविधान संशोधन’ नहीं माने जाएंगे

  • तात्पर्य: संसद ऐसे बदलावों को केवल साधारण बहुमत (Simple Majority) से पारित कर सकती है। इसके लिए किसी विशेष बहुमत की आवश्यकता नहीं होती।

तुलनात्मक अध्ययन: अनुच्छेद 2 vs अनुच्छेद 3

आधारअनुच्छेद 2अनुच्छेद 3
क्षेत्रबाहरी क्षेत्र (External)आंतरिक क्षेत्र (Internal)
उद्देश्यनए क्षेत्र को भारत में मिलानावर्तमान राज्यों को तोड़ना या जोड़ना
प्रक्रियासंसद की सामान्य शक्तिराष्ट्रपति की सिफारिश अनिवार्य
उदाहरणसिक्किम, पुडुचेरी, गोवातेलंगाना, उत्तराखंड, झारखंड

💡 शिक्षक का ‘एग्जाम अलर्ट’ (Exam Alert):

बेरुबारी यूनियन मामला (1960): सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि अगर भारत अपना कोई क्षेत्र किसी विदेशी देश को देना चाहता है, तो वह अनुच्छेद 3 से नहीं हो सकता; उसके लिए अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन करना अनिवार्य होगा।

मुख्य तथ्य

  • भारत ‘विनाशी राज्यों का अविनाशी संघ’ है।
  • राज्य की सहमति बाध्यकारी नहीं।
  • राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश आवश्यक।
  • अनुच्छेद 368 लागू नहीं होता।
संघ और उसका राज्य क्षेत्र (भाग-1) अनुच्छेद 1 भारत = राज्यों का संघ (Union of States) अनुच्छेद 2 नए राज्यों का प्रवेश (विदेशी क्षेत्र का अधिग्रहण) अनुच्छेद 3 आंतरिक पुनर्गठन (सीमा, नाम में परिवर्तन) अनुच्छेद 4 साधारण बहुमत (Art 368 लागू नहीं)Prepared by Vikas Singh | pdfnotes.in

राज्यों का पुनर्गठन और आयोग (Reorganization of States & Commissions)

स्वतंत्रता के समय भारत में राज्यों का ढांचा बहुत जटिल था। दक्षिण भारत से भाषाई आधार पर राज्यों की मांग उठने के बाद सरकार ने कई आयोगों का गठन किया।

संघ एवं इसका राज्य क्षेत्र (sansad bhavan)

1. शुरुआती चुनौतियाँ (Integration of Princely States)

स्वतंत्रता के समय 552 रियासतों में से 549 भारत में शामिल हो गईं, लेकिन 3 रियासतों को विशेष प्रयासों से मिलाया गया:

  • हैदराबाद: पुलिस कार्रवाई (Operation Polo)।
  • जूनागढ़: जनमत संग्रह (Referendum)।
  • कश्मीर: विलय पत्र (Instrument of Accession) पर हस्ताक्षर।

2. प्रमुख पुनर्गठन आयोग (Major Commissions)

आयोग / समितिवर्षप्रमुख सदस्यसिफारिश / निष्कर्ष
एस.के. धर आयोग1948एस.के. धरभाषाई आधार को अस्वीकार किया; प्रशासनिक सुविधा को आधार माना।
JVP समिति1948जवाहरलाल नेहरू, वल्लभभाई पटेल, पट्टाभि सीतारमैयाभाषाई आधार को पूरी तरह नकार दिया।
फजल अली आयोग1953फजल अली (अध्यक्ष), के.एम. पणिक्कर, एच.एन. कुंजरूभाषाई आधार को स्वीकार किया, लेकिन ‘एक राज्य-एक भाषा’ को खारिज किया।

3. ऐतिहासिक घटना: आंध्र प्रदेश का गठन (1953)

भाषाई आधार पर राज्यों की मांग तब हिंसक हो गई जब कांग्रेसी कार्यकर्ता पोट्टी श्रीरामुलु की 56 दिनों की भूख हड़ताल के बाद मृत्यु हो गई। इसके दबाव में सरकार को 1953 में भाषाई आधार पर प्रथम राज्य ‘आंध्र प्रदेश’ का गठन करना पड़ा।

4. राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956

फजल अली आयोग की सिफारिशों के आधार पर सरकार ने राज्यों का वर्गीकरण (Part A, B, C, D) समाप्त कर दिया।

  • 7वां संविधान संशोधन (1956): इसके तहत भारत में 14 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए।

💡 शिक्षक का ‘स्मार्ट नोट्स’ (Smart Notes):

मैं छात्रों को यह याद रखने की सलाह देता हूँ कि फजल अली आयोग ने भले ही भाषा को आधार माना, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कहा कि “देश की एकता और सुरक्षा” सर्वोपरि होनी चाहिए। राज्यों का पुनर्गठन केवल भाषा नहीं, बल्कि वित्तीय और प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी होना चाहिए।

राज्यों के पुनर्गठन से जुड़े प्रमुख आयोग

आयोग / समितिवर्षमुख्य आधार / सिफारिश
धर आयोग1948प्रशासनिक सुविधा (भाषा को नकारा)
JVP समिति1948भाषाई आधार को पूरी तरह अस्वीकार किया
फजल अली आयोग1953भाषाई आधार को स्वीकार किया (एक राज्य-एक भाषा नहीं)
राज्य पुनर्गठन एक्ट195614 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेशों का निर्माण
धर आयोग (1948) प्रशासनिक सुविधा JVP समिति (1948) भाषाई आधार नकारा आंध्र प्रदेश (1953) पहला भाषाई राज्य फजल अली (1953) भाषा को स्वीकारा Reorg Act (1956) 14 राज्य, 6 UTsEvolution of State Reorganization | pdfnotes.in

महत्वपूर्ण बिंदु

  • आंध्र प्रदेश (1953) – पहला भाषाई राज्य
  • 1956 – राज्यों का बड़ा पुनर्गठन
  • 1960 – महाराष्ट्र व गुजरात
  • 2014 – तेलंगाना

विकास जी, “नए राज्यों के गठन का क्रम और तथ्य” वाला यह खंड आपके ब्लॉग का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि परीक्षाओं में अक्सर राज्यों के गठन का वर्ष और उनका ‘क्रम’ (Sequence) मिलान करने के लिए पूछा जाता है।

लक्ष्मीकांत के 8वें संस्करण के नवीनतम अपडेट्स के साथ, यहाँ आपके लेख का Section III तैयार है:


नए राज्यों के गठन का क्रम और तथ्य (Formation of New States: Timeline)

1956 के बाद भारतीय मानचित्र में कई बड़े बदलाव हुए। यहाँ 15वें राज्य (गुजरात) से लेकर 28वें राज्य (तेलंगाना) तक का विस्तृत सफर दिया गया है:

1. 1960 के दशक के बदलाव

  • गुजरात (1960): द्विभाषी राज्य बॉम्बे को विभाजित कर महाराष्ट्र और गुजरात (15वां राज्य) बनाए गए।
  • दादरा और नगर हवेली (1961): 10वें संशोधन द्वारा इसे केंद्र शासित प्रदेश (UT) बनाया गया।
  • गोवा, दमन और दीव (1962): 12वें संशोधन द्वारा इन्हें UT बनाया गया। (गोवा बाद में 1987 में राज्य बना)।
  • पुडुचेरी (1962): 14वें संशोधन द्वारा इसे UT बनाया गया।
  • नागालैंड (1963): असम के नागा पहाड़ियों को अलग कर भारत का 16वां राज्य बनाया गया।
  • हरियाणा (1966): पंजाब से अलग होकर हरियाणा (17वां राज्य) और चंडीगढ़ (UT) बना।

2. 1970 और 80 के दशक के बदलाव

  • हिमाचल प्रदेश (1971): इसे UT से राज्य का दर्जा दिया गया (18वां राज्य)।
  • मणिपुर, त्रिपुरा और मेघालय (1972): पूर्वोत्तर क्षेत्र पुनर्गठन अधिनियम द्वारा इन्हें राज्य बनाया गया।
  • सिक्किम (1974-75): * 35वें संशोधन (1974) द्वारा ‘सह-राज्य’ (Associate State) बना।
    • 36वें संशोधन (1975) द्वारा भारत का 22वां पूर्ण राज्य बना।
  • मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और गोवा (1987): ये क्रमशः 23वें, 24वें और 25वें राज्य बने।

3. आधुनिक काल के बदलाव (2000 – वर्तमान)

  • नवंबर 2000 में तीन नए राज्य:
    1. छत्तीसगढ़ (26वां): मध्य प्रदेश से अलग हुआ (1 नवंबर)।
    2. उत्तराखंड (27वां): उत्तर प्रदेश से अलग हुआ (9 नवंबर)।
    3. झारखंड (28वां): बिहार से अलग हुआ (15 नवंबर)।
  • तेलंगाना (2014): 2 जून 2014 को आंध्र प्रदेश से अलग होकर भारत का 29वां राज्य (वर्तमान में 28वां) बना।
  • जम्मू-कश्मीर और लद्दाख (2019): अनुच्छेद 370 के हटने के बाद जम्मू-कश्मीर राज्य का दर्जा समाप्त कर इसे दो अलग केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) में बदल दिया गया।

राज्यों के गठन का क्विक चार्ट (याद रखने की ट्रिक)

राज्यवर्षमूल राज्य (Parent State)
गुजरात1960बॉम्बे
नागालैंड1963असम
हरियाणा1966पंजाब
हिमाचल1971UT से पदोन्नत
सिक्किम1975जनमत संग्रह के बाद
झारखंड2000बिहार
तेलंगाना2014आंध्र प्रदेश

💡Memory Booster:

1950 में ‘संयुक्त प्रांत’ (United Provinces) का नाम बदलकर उत्तर प्रदेश किया गया था, जो नाम परिवर्तन का पहला मामला था। इसके बाद मद्रास का तमिलनाडु (1969) और मैसूर का कर्नाटक (1973) होना भी परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।

🎯 One-Line Rapid Revision

  1. भारतीय संविधान का भाग 1 संघ और उसके राज्य क्षेत्रों से संबंधित है।
  2. अनुच्छेद 1 के अनुसार, भारत को ‘राज्यों का संघ’ (Union of States) कहा गया है।
  3. ‘राज्यों का संघ’ शब्द यह दर्शाता है कि भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम नहीं है।
  4. किसी भी राज्य को भारतीय संघ से अलग होने का अधिकार नहीं है।
  5. अनुच्छेद 1 भारत के राज्य क्षेत्र को तीन श्रेणियों में बांटता है: राज्यों के क्षेत्र, संघ राज्य क्षेत्र, और ऐसे क्षेत्र जिन्हें भारत सरकार द्वारा अधिग्रहित किया जा सकता है।
  6. वर्तमान में भारत में 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं।
  7. राज्यों और उनके क्षेत्रों के नाम संविधान की पहली अनुसूची में दिए गए हैं।
  8. ‘भारत का संघ’ में केवल राज्य शामिल हैं, जबकि ‘भारत का राज्य क्षेत्र’ में संघ राज्य क्षेत्र और अधिग्रहित क्षेत्र भी शामिल हैं।
  9. अनुच्छेद 2 संसद को भारतीय संघ में नए राज्यों के प्रवेश या उनकी स्थापना की शक्ति देता है। (जैसे सिक्किम)।
  10. अनुच्छेद 3 संसद को राज्यों के आंतरिक पुनर्गठन की शक्ति प्रदान करता है।
  11. अनुच्छेद 3 के तहत संसद किसी राज्य का क्षेत्र बढ़ा सकती है या घटा सकती है।
  12. संसद किसी राज्य की सीमाओं या नाम में परिवर्तन कर सकती है।
  13. दो या अधिक राज्यों के हिस्सों को मिलाकर एक नया राज्य बनाने की शक्ति भी संसद के पास है।
  14. राज्यों के नाम और सीमा में बदलाव के लिए संविधान संशोधन अनुच्छेद 368 की प्रक्रिया नहीं अपनानी पड़ती।
  15. राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित विधेयक संसद में केवल राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश से ही पेश किया जा सकता है।
  16. राष्ट्रपति उस विधेयक को संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास विचार के लिए भेजता है।
  17. राज्य विधानमंडल का विचार संसद के लिए बाध्यकारी नहीं है।
  18. संसद राज्य की सहमति के बिना भी उसके भूगोल को बदल सकती है, इसलिए भारत को ‘विनाशी राज्यों का अविनाशी संघ’ कहा जाता है।
  19. केंद्र शासित प्रदेशों के मामले में संबंधित विधानमंडल के पास विचार भेजने की आवश्यकता नहीं है।
  20. अनुच्छेद 4 घोषणा करता है कि अनुच्छेद 2 और 3 के तहत किए गए बदलाव संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन नहीं माने जाएंगे।
  21. इसका अर्थ है कि ऐसे बदलावों को संसद द्वारा साधारण बहुमत से पारित किया जा सकता है।
  22. साधारण बहुमत का अर्थ है— उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का 50% से अधिक।
  23. बेरुबारी यूनियन मामला (1960) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारतीय क्षेत्र को किसी विदेशी देश को देने के लिए अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन अनिवार्य है।
  24. 9वें संविधान संशोधन (1960) द्वारा बेरुबारी क्षेत्र पाकिस्तान को हस्तांतरित किया गया था।
  25. स्वतंत्रता के समय भारत में ब्रिटिश प्रांत और देसी रियासतें (Princely States) दो तरह की इकाइयां थीं।
  26. भारत की 552 देसी रियासतों में से 549 स्वेच्छा से भारत में शामिल हो गईं।
  27. तीन रियासतों— हैदराबाद, जूनागढ़ और कश्मीर ने शुरुआत में शामिल होने से मना किया था।
  28. हैदराबाद को ‘पुलिस कार्रवाई’ (Operation Polo) के माध्यम से मिलाया गया।
  29. जूनागढ़ को ‘जनमत संग्रह’ (Referendum) के द्वारा भारत में शामिल किया गया।
  30. कश्मीर को ‘विलय पत्र’ (Instrument of Accession) के माध्यम से भारत का हिस्सा बनाया गया।
  31. दक्षिण भारत से भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की मांग सबसे पहले उठी।
  32. एस.के. धर आयोग (1948): इसने राज्यों के पुनर्गठन के लिए भाषाई आधार को खारिज कर दिया।
  33. धर आयोग ने प्रशासनिक सुविधा को पुनर्गठन का मुख्य आधार माना।
  34. JVP समिति (1948): इसमें जवाहरलाल नेहरू, वल्लभभाई पटेल और पट्टाभि सीतारमैया शामिल थे।
  35. JVP समिति ने भी भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन को औपचारिक रूप से अस्वीकार कर दिया।
  36. अक्टूबर 1953 में, भारत सरकार को भाषाई आधार पर पहले राज्य ‘आंध्र प्रदेश’ का गठन करना पड़ा।
  37. आंध्र प्रदेश का गठन 56 दिनों की भूख हड़ताल के बाद पोट्टी श्रीरामुलु की मृत्यु के कारण हुआ।
  38. फजल अली आयोग (1953): यह तीन सदस्यीय आयोग था (फजल अली, के.एम. पणिक्कर और एच.एन. कुंजरू)।
  39. फजल अली आयोग ने राज्यों के पुनर्गठन के लिए भाषाई आधार को स्वीकार कर लिया। हालांकि, इसने ‘एक राज्य-एक भाषा’ के सिद्धांत को पूरी तरह खारिज कर दिया।
  40. राज्य पुनर्गठन अधिनियम (1956): इसके तहत 14 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए।
  41. 7वें संविधान संशोधन (1956) द्वारा राज्यों की श्रेणियों को समाप्त कर दिया गया।
  42. 1960 में द्विभाषी राज्य बॉम्बे को विभाजित कर महाराष्ट्र और गुजरात बनाए गए।
  43. दादरा और नगर हवेली को 1954 में पुर्तगालियों से मुक्त कराया गया था (10वें संशोधन 1961 द्वारा UT बना)।
  44. गोवा और दमन-दीव को 1961 में पुलिस कार्रवाई के जरिए पुर्तगालियों से वापस लिया गया।
  45. 12वें संशोधन 1962 के द्वारा इन्हें केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया (गोवा 1987 में राज्य बना)।
  46. पुडुचेरी का प्रशासन फ्रांस ने 1954 में भारत को सौंपा था (14वें संशोधन द्वारा UT बना)।
  47. नागालैंड का गठन 1963 में असम से अलग करके किया गया।
  48. 1966 में पंजाब को विभाजित कर हरियाणा (17वां राज्य) और चंडीगढ़ (UT) बनाया गया।
  49. हिमाचल प्रदेश को 1971 में केंद्र शासित प्रदेश से राज्य का दर्जा दिया गया।
  50. सिक्किम को 35वें संशोधन (1974) द्वारा ‘सह-राज्य’ का दर्जा दिया गया था।
  51. 36वें संविधान संशोधन (1975) द्वारा सिक्किम को भारतीय संघ का पूर्ण राज्य (22वां) बनाया गया।
  52. 1987 में मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और गोवा राज्य बने।
  53. वर्ष 2000 में तीन नए राज्य बने: छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और झारखंड। छत्तीसगढ़ (26वां राज्य) मध्य प्रदेश से अलग होकर बना, उत्तराखंड (27वां राज्य) उत्तर प्रदेश से अलग होकर बना, झारखंड (28वां राज्य) बिहार से अलग होकर बना।
  54. तेलंगाना का गठन 2 जून 2014 को आंध्र प्रदेश से अलग करके किया गया (29वां राज्य)।
  55. जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 ने राज्य का दर्जा समाप्त कर दिया।
  56. अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो अलग केंद्र शासित प्रदेश हैं।
  57. दादरा-नगर हवेली और दमन-दीव का विलय कर 2020 में एक ही केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया।
  58. वर्तमान में भारत में राज्यों की संख्या 28 और UT की संख्या 8 है।
  59. संयुक्त प्रांत (United Provinces) का नाम बदलकर 1950 में उत्तर प्रदेश किया गया था।
  60. मद्रास का नाम बदलकर 1969 में तमिलनाडु किया गया।
  61. मैसूर का नाम बदलकर 1973 में कर्नाटक किया गया।
  62. लक्कादीव-मिनिकॉय-अमीनदीवी का नाम बदलकर 1973 में लक्षद्वीप किया गया।
  63. उत्तरांचल का नाम बदलकर 2006 में उत्तराखंड किया गया।
  64. पांडिचेरी का नाम बदलकर 2006 में पुडुचेरी किया गया।
  65. उड़ीसा का नाम बदलकर 2011 में ओडिशा किया गया।
  66. दिल्ली को 69वें संशोधन (1991) द्वारा ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र’ (NCR) का दर्जा मिला।
  67. चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा दोनों की संयुक्त राजधानी और एक UT है।
  68. लक्षद्वीप भारत का सबसे छोटा केंद्र शासित प्रदेश है।
  69. लद्दाख क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा केंद्र शासित प्रदेश है।
  70. पुडुचेरी तीन अलग-अलग राज्यों (आंध्र, तमिलनाडु, केरल) में फैला हुआ है।
  71. 100वां संविधान संशोधन (2015): भारत और बांग्लादेश के बीच क्षेत्रों का आदान-प्रदान (Land Boundary Agreement)।

🔥 PYQ (Previous Year Questions)

🟢 प्रश्न 1 भारत को ‘राज्यों का संघ’ किस अनुच्छेद में कहा गया है?(UPSC)

(A) अनुच्छेद 1
(B) अनुच्छेद 2
(C) अनुच्छेद 3
(D) अनुच्छेद 4

उत्तर: (A) अनुच्छेद 1


🟢 प्रश्न 2 निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:(UPSC)

  1. संसद राज्य की सीमा बदल सकती है।
  2. इसके लिए संबंधित राज्य की सहमति आवश्यक है।

सही विकल्प चुनें:

(A) केवल 1
(B) केवल 2
(C) 1 और 2 दोनों
(D) न 1, न 2

उत्तर: (A) केवल 1
(राज्य की राय ली जाती है, लेकिन सहमति बाध्यकारी नहीं है)


🟢 प्रश्न 3 नए राज्य के गठन का विधेयक संसद में किसकी पूर्व सिफारिश पर प्रस्तुत किया जाता है?(SSC CGL)

(A) प्रधानमंत्री
(B) राष्ट्रपति
(C) राज्यपाल
(D) मुख्य न्यायाधीश

उत्तर: (B) राष्ट्रपति


🟢 प्रश्न 4 अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद किस प्रकार का बहुमत प्रयोग करती है?(UPPSC)

(A) विशेष बहुमत
(B) साधारण बहुमत
(C) 2/3 बहुमत
(D) सर्वसम्मति

उत्तर: (B) साधारण बहुमत


🟢 प्रश्न 5 निम्नलिखित में से किस राज्य को 36वें संविधान संशोधन द्वारा भारत का पूर्ण राज्य बनाया गया?(UPSC)

(A) गोवा
(B) नागालैंड
(C) सिक्किम
(D) मिजोरम

उत्तर: (C) सिक्किम


🟢 प्रश्न 6 राज्य पुनर्गठन अधिनियम किस वर्ष पारित किया गया?(State PCS)

(A) 1950
(B) 1953
(C) 1956
(D) 1960

उत्तर: (C) 1956


🟢 प्रश्न 7 निम्नलिखित में से कौन-सा आयोग भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के पक्ष में था?(UPSC)

(A) धर आयोग
(B) JVP समिति
(C) फजल अली आयोग
(D) शाह आयोग

उत्तर: (C) फजल अली आयोग


🟢 प्रश्न 8 बॉम्बे राज्य का विभाजन कर महाराष्ट्र और गुजरात किस वर्ष बनाए गए?(SSC)

(A) 1956
(B) 1960
(C) 1966
(D) 1971

उत्तर: (B) 1960


🟢 प्रश्न 9 भारत और बांग्लादेश के बीच भूमि सीमा समझौता किस संविधान संशोधन द्वारा लागू हुआ?(UPSC)

(A) 97वाँ
(B) 99वाँ
(C) 100वाँ
(D) 101वाँ

उत्तर: (C) 100वाँ संशोधन (2015)


🟢 प्रश्न 10 ‘विनाशी राज्यों का अविनाशी संघ’ किस देश के संदर्भ में कहा जाता है?(Railway)

(A) अमेरिका
(B) ब्रिटेन
(C) भारत
(D) कनाडा

उत्तर: (C) भारत


🎯 UPSC Level Statement-Based Practice

प्रश्न 11 निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:(UPSC Style)

  1. अनुच्छेद 2 विदेशी राज्यों के प्रवेश से संबंधित है।
  2. अनुच्छेद 3 राज्यों के आंतरिक पुनर्गठन से संबंधित है।
  3. अनुच्छेद 4 के तहत किए गए परिवर्तन अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संशोधन माने जाते हैं।

सही विकल्प चुनें:

(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 1 और 3
(D) 1, 2 और 3

उत्तर: (A) केवल 1 और 2
(अनुच्छेद 4 के तहत परिवर्तन संविधान संशोधन नहीं माने जाते)


❓ FAQ

प्रश्न 1: भारत को ‘राज्यों का संघ’ क्यों कहा गया है?

क्योंकि भारतीय संघ राज्यों के समझौते का परिणाम नहीं है और कोई भी राज्य अलग नहीं हो सकता।


प्रश्न 2: क्या संसद राज्य की सहमति के बिना उसकी सीमा बदल सकती है?

हाँ, संसद राज्य की राय लेने के बाद उसकी सीमा बदल सकती है; सहमति बाध्यकारी नहीं है।


प्रश्न 3: नए राज्य के गठन के लिए किस प्रकार का बहुमत चाहिए?

साधारण बहुमत।


प्रश्न 4: राज्यों के नाम और सीमा में परिवर्तन क्या संविधान संशोधन है?

नहीं, यह अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संशोधन नहीं माना जाता।


प्रश्न 5: वर्तमान में भारत में कितने राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हैं?

भारत में 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं।

Vikas Singh

लेखक: विकास सिंह

विकास सिंह 15+ वर्षों के शिक्षण अनुभव वाले General Studies (GS) शिक्षक हैं। उन्होंने GS Faculty के रूप में कार्य किया है तथा दो बार UPSC Mains परीक्षा में सम्मिलित हो चुके हैं। वे भारतीय राजव्यवस्था, इतिहास, भूगोल और सामान्य विज्ञान के विशेषज्ञ हैं। वर्तमान में वे वाराणसी में अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं और अपने YouTube चैनल Study2Study के माध्यम से शिक्षा जगत में योगदान दे रहे हैं।