भारतीय संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (1773–1947) – 1935 अधिनियम सहित | 8वां संस्करण अपडेटेड

भारतीय संविधान रातों-रात नहीं बना, बल्कि यह ब्रिटिश शासन के दौरान समय-समय पर लाए गए अधिनियमों का परिणाम है। भारतीय संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट से शुरू होकर 1947 के स्वतंत्रता अधिनियम तक ब्रिटिश शासन द्वारा पारित विभिन्न अधिनियमों में निहित है। यह क्रमिक विकास कंपनी शासन (1773–1858) से क्राउन शासन (1858–1947) में बदला, जिसने केंद्रीकरण, संसदीय प्रणाली और कानून के शासन की नींव रखी, जो संविधान सभा के माध्यम से स्वतंत्र भारत के संविधान का आधार बना।

✨ M. Laxmikanth 8th Edition (2026) Update

इस लेख को एम. लक्ष्मीकांत के नवीनतम 8वें संस्करण (आठवां संस्करण) के आधार पर अपडेट कर दिया गया है। हमने उन सभी बारीक पॉइंट्स को जोड़ दिया है जो पुराने नोट्स में नहीं थे। 2026-27 की परीक्षाओं के लिए यह सबसे सटीक और अद्यतन (Updated) सामग्री है।

संवैधानिक विकास की विकास यात्रा (1773 – 1947)

1773: रेगुलेटिंग एक्ट
नियमन और नियंत्रण की शुरुआत
1833: चार्टर अधिनियम
केंद्रीकरण (भारत का गवर्नर जनरल)
1858: भारत सरकार अधिनियम
सत्ता का हस्तांतरण (क्राउन का शासन)
1919/1935: उत्तरदायी शासन
द्वैध शासन और प्रांतीय स्वायत्तता
1947: स्वतंत्रता अधिनियम
पूर्ण संप्रभु लोकतांत्रिक भारत
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ऑडियो सारांश: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

M. LAXMIKANTH 8TH EDITION

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भारतीय संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि 1773-1947 टाइमलाइन

भारत में संवैधानिक विकास की नींव ब्रिटिश शासन के दौरान पड़े विभिन्न अधिनियमों (Acts) से पड़ी। इसे हम दो भागों में पढ़ते हैं:

Table of Contents

भारतीय संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि कंपनी का शासन (1773 से 1858)

  • इस कालखंड में ब्रिटिश संसद ने धीरे-धीरे ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यावसायिक कार्यों को सीमित किया और भारत में प्रशासनिक एवं विधायी ढांचे का विस्तार किया।

1773 का रेगुलेटिंग एक्ट (भारत में संविधान की नींव)

यह ब्रिटिश संसद का कंपनी के कार्यों को नियमित और नियंत्रित करने की दिशा में पहला कदम था।

  • गवर्नर जनरल का पद: बंगाल के गवर्नर को अब ‘बंगाल का गवर्नर जनरल’ बनाया गया। (प्रथम: लॉर्ड वारन हेस्टिंग्स)।
  • परिषद: गवर्नर जनरल की सहायता के लिए 4 सदस्यीय कार्यकारी परिषद का गठन।
  • न्यायपालिका: 1774 में कलकत्ता में एक उच्चतम न्यायालय (1 मुख्य न्यायाधीश + 3 अन्य) की स्थापना।
  • भ्रष्टाचार पर रोक: कंपनी के कर्मचारियों को निजी व्यापार और भारतीयों से उपहार लेने पर पूर्ण प्रतिबंध।

1781 का संशोधन अधिनियम (Act of Settlement)

  • रेगुलेटिंग एक्ट की खामियों को दूर करने के लिए इसे लाया गया। इसने गवर्नर जनरल और उसकी काउंसिल को सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर कर दिया।

1784 का पिट्स इंडिया एक्ट (दोहरा प्रशासन)

  • द्वैध शासन: व्यापारिक कार्यों के लिए ‘कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स’ और राजनीतिक कार्यों के लिए ‘बोर्ड ऑफ कंट्रोल’ का गठन।
  • ब्रिटिश आधिपत्य: पहली बार भारत में कंपनी के अधीन क्षेत्र को ‘ब्रिटिश आधिपत्य का क्षेत्र’ कहा गया।

1813 का चार्टर अधिनियम (व्यापारिक अंत की शुरुआत)

  • एकाधिकार की समाप्ति: कंपनी का भारत में व्यापारिक एकाधिकार समाप्त कर दिया गया (केवल चाय और चीन के साथ व्यापार को छोड़कर)।
  • ईसाई मिशनरी: भारत में ईसाई धर्म के प्रचार की अनुमति मिली।
  • शिक्षा: भारत में शिक्षा के प्रसार के लिए प्रतिवर्ष ₹1 लाख खर्च करने का प्रावधान।

1833 का चार्टर अधिनियम (पूर्ण केंद्रीकरण)

  • भारत का गवर्नर जनरल: बंगाल का गवर्नर जनरल अब ‘भारत का गवर्नर जनरल’ बना। (लॉर्ड विलियम बेंटिक भारत के प्रथम गवर्नर जनरल)।
  • प्रशासनिक निकाय: ईस्ट इंडिया कंपनी की व्यापारिक गतिविधियाँ पूरी तरह समाप्त कर इसे विशुद्ध रूप से प्रशासनिक निकाय बना दिया गया।
  • विधि आयोग: भारत के कानूनों को लिपिबद्ध करने के लिए लॉर्ड मैकाले की अध्यक्षता में प्रथम विधि आयोग बना।
  • 1833 का चार्टर: इस अधिनियम ने सिविल सेवकों के चयन के लिए ‘खुली प्रतियोगिता’ का प्रयास किया था (लेकिन कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स के विरोध के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका)।

1853 का चार्टर अधिनियम (प्रशासनिक सुधार)

  • कार्य पृथक्करण: पहली बार गवर्नर जनरल की परिषद के ‘विधायी’ और ‘प्रशासनिक’ कार्यों को अलग किया गया।
  • भारतीय विधान परिषद:भारतीय (केंद्रीय) विधान परिषद में जो 6 नए सदस्य जोड़े गए थे, उन्हें ‘विधान पार्षद’ कहा गया।
  • सिविल सेवा: सिविल सेवकों की भर्ती के लिए खुली प्रतियोगिता का प्रावधान। (1854 में मैकाले समिति का गठन)।

विशेष टिप्पणी (Pro-Note):

1781 का एक्ट (Act of Settlement) 1773 के एक्ट की गलतियों को सुधारने के लिए आया था, जिसने सुप्रीम कोर्ट और गवर्नर जनरल की शक्तियों के बीच संतुलन बनाया। 1833 का एक्ट केंद्रीकरण का शिखर (Zenith) था।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि कंपनी का शासन (1773-1858) 1773 रेगुलेटिंग एक्ट गवर्नर जनरल पद कलकत्ता SC (1774) 1784 पिट्स इंडिया एक्ट द्वैध शासन Board of Control 1813 चार्टर एक्ट एकाधिकार समाप्त ₹1 लाख शिक्षा 1833 चार्टर एक्ट भारत का G.G. विधि आयोग गठन 1853 चार्टर एक्ट विधायी कार्य अलग खुली प्रतियोगिता 1858 भारत सरकार एक्ट कंपनी शासन अंत वायसराय पद शुरूऐतिहासिक पृष्ठभूमि Timeline – pdfnotes.in

भारतीय संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि सम्राट का शासन (1858 से 1947)

1857 के सिपाही विद्रोह ने ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन की कमियों को उजागर कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप ब्रिटिश संसद ने भारत का शासन सीधे ‘ब्रिटिश क्राउन’ (सम्राट) को सौंप दिया।

1858 का भारत सरकार अधिनियम (सुशासन का अधिनियम)

  • शासन का हस्तांतरण: भारत का शासन अब सीधे महारानी विक्टोरिया के अधीन हो गया।
  • वायसराय का पद: गवर्नर जनरल का पदनाम बदलकर ‘वायसराय’ कर दिया गया। (लॉर्ड कैनिंग भारत के प्रथम वायसराय बने)।
  • द्वैध शासन की समाप्ति: ‘बोर्ड ऑफ कंट्रोल’ और ‘कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स’ को समाप्त कर दिया गया।
  • नया पद: ‘भारत का राज्य सचिव’ (Secretary of State) का सृजन हुआ, जो ब्रिटिश कैबिनेट का सदस्य था। उसकी सहायता के लिए 15 सदस्यीय ‘इंडिया काउंसिल’ बनी।

1861, 1892 और 1909 के परिषद अधिनियम (प्रतिनिधित्व की शुरुआत)

  • 1861 का एक्ट: वायसराय को अध्यादेश (Ordinance) जारी करने की शक्ति मिली। लॉर्ड कैनिंग ने ‘पोर्टफोलियो (विभागीय) प्रणाली’ को मान्यता दी। पहली बार तीन भारतीयों (बनारस के राजा, पटियाला के महाराजा, सर दिनकर राव) को विधान परिषद में मनोनीत किया गया।
  • 1892 का एक्ट: विधान परिषदों को बजट पर चर्चा करने और कार्यपालिका से प्रश्न पूछने की शक्ति मिली।
  • 1909 का एक्ट (मार्ले-मिंटो सुधार): इसने सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व की शुरुआत की। सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा वायसराय की कार्यपालिका परिषद में शामिल होने वाले पहले भारतीय (विधि सदस्य) बने।

1919 का भारत शासन अधिनियम (मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार)

  • प्रांतों में द्वैध शासन (Dyarchy): प्रांतीय विषयों को ‘हस्तांतरित’ और ‘आरक्षित’ भागों में बांटा गया।
  • द्विसदनीय व्यवस्था: केंद्र में पहली बार लोकसभा और राज्यसभा (द्विसदनीय व्यवस्था) की शुरुआत हुई।
  • प्रत्यक्ष निर्वाचन: देश में पहली बार प्रत्यक्ष चुनाव और महिलाओं को वोट देने का अधिकार मिला।
  • लोक सेवा आयोग: 1926 में ‘केंद्रीय लोक सेवा आयोग’ का गठन किया गया।

1935 का भारत शासन अधिनियम (संविधान का मुख्य स्रोत)

यह अब तक का सबसे विस्तृत दस्तावेज था, जिसमें 321 धाराएं और 10 अनुसूचियां थीं।

  • प्रांतीय स्वायत्तता: प्रांतों में द्वैध शासन समाप्त कर उन्हें स्वतंत्र पहचान दी गई।
  • केंद्र में द्वैध शासन: प्रांतीय स्तर से हटाकर द्वैध शासन को केंद्र में लागू किया गया।
  • इसने 11 राज्यों में से 6 राज्यों में द्विसदनीय व्यवस्था (विधान परिषद और विधानसभा) शुरू की थी (जैसे- बंगाल, बॉम्बे, मद्रास, बिहार, संयुक्त प्रांत और असम)।
  • संस्थाएं: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और संघीय न्यायालय (1937) की स्थापना।
  • शक्तियों का विभाजन: शक्तियों का बंटवारा इस प्रकार था:
    • संघीय सूची (59 विषय)
    • प्रांतीय सूची (54 विषय)
    • समवर्ती सूची (36 विषय)
    • अवशिष्ट शक्तियां (Residuary Powers): ये वायसराय को दी गई थीं।
  • 1919 का अधिनियम (विषय पृथक्करण): केंद्रीय और प्रांतीय विषयों की सूची को अलग किया गया। प्रांतीय विषयों को पुनः दो भागों में बांटा गया— हस्तांतरित (Transferred) और आरक्षित (Reserved)

1947 का भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम

  • इसने ‘भारत का सम्राट’ शब्द को शाही पदवी से समाप्त कर दिया।
  • स्वतंत्र राष्ट्र: 15 अगस्त 1947 को भारत को स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र घोषित किया गया।
  • विभाजन: भारत और पाकिस्तान नामक दो डोमिनियन राज्यों का सृजन।
  • वायसराय का अंत: वायसराय का पद समाप्त कर दोनों राज्यों के लिए अलग-अलग ‘गवर्नर जनरल’ के पद बनाए गए।
  • ब्रिटिश शासक के ‘विधेयकों पर वीटो’ करने या उन्हें स्वीकृति के लिए आरक्षित रखने के अधिकार को समाप्त कर दिया गया, लेकिन यह अधिकार गवर्नर जनरल को दे दिया गया।
सम्राट का शासन (1858-1947) 1858 भारत सरकार एक्ट वायसराय पद शुरू Direct Crown Rule 1909 मार्ले-मिंटो सुधार सांप्रदायिक निर्वाचन Separate Electorate 1919 मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड प्रांतों में द्वैध शासन लोक सेवा आयोग 1935 भारत शासन अधिनियम प्रांतीय स्वायत्तता केंद्र में द्वैध शासन RBI & Federal Court 1947 स्वतंत्रता अधिनियम भारत-पाक विभाजन संप्रभु राष्ट्र का जन्म परीक्षा उपयोगी तथ्य: 1935 का अधिनियम वर्तमान संविधान का 70% आधार है। मोंटेग्यू सुधार (1919) ने ही प्रत्यक्ष निर्वाचन और द्विसदनीय व्यवस्था की नींव रखी थी।सम्राट का शासन Timeline – Prepared for pdfnotes.in

रिवीजन टेबल (1858 – 1947)

वर्षमुख्य विशेषतावायसराय / गवर्नर जनरल
1858वायसराय पद का सृजनलॉर्ड कैनिंग
1861पोर्टफोलियो प्रणालीलॉर्ड कैनिंग
1909सांप्रदायिक निर्वाचनलॉर्ड मिंटो
1919प्रांतों में द्वैध शासनलॉर्ड चेम्सफोर्ड
1935प्रांतीय स्वायत्तता / RBIलॉर्ड विलिंगडन
1947भारत की स्वतंत्रतालॉर्ड माउंटबेटन
  • 1919 के एक्ट द्वारा शुरू किया गया ‘विषय पृथक्करण’ ही आज की सातवीं अनुसूची का बीज था। साथ ही, 1935 का अधिनियम भारतीय संविधान का लगभग 70% ब्लूप्रिंट तैयार करता है।
महत्वपूर्ण संस्था/प्रणालीस्थापना/अधिनियमविशेष टिप्पणी
विधि आयोग (Law Commission)1833 का चार्टर एक्टलॉर्ड मैकाले पहले अध्यक्ष बने
लोक सेवा आयोग (CPSC)1919 का एक्ट (ली आयोग)1926 में स्थापना हुई
सांप्रदायिक अवार्ड (Communal Award)1932 (रैमजे मैकडोनाल्ड)दलितों के लिए अलग निर्वाचन
संघीय न्यायालय (Federal Court)1935 का एक्ट1937 में कार्य शुरू किया

भारतीय संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (1773–1947) – कंपनी का शासन

  1. 1773 का रेगुलेटिंग एक्ट: भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के कार्यों को नियमित करने का यह पहला कदम था।
  2. इसके द्वारा बंगाल के गवर्नर को ‘बंगाल का गवर्नर जनरल’ बनाया गया।
  3. लॉर्ड वारन हेस्टिंग्स बंगाल के पहले गवर्नर जनरल बने।
  4. इसके तहत 1774 में कलकत्ता में एक उच्चतम न्यायालय की स्थापना की गई (1 मुख्य न्यायाधीश और 3 अन्य)।
  5. कंपनी के कर्मचारियों को निजी व्यापार करने और भारतीयों से उपहार लेने पर रोक लगा दी गई।
  6. 1784 का पिट्स इंडिया एक्ट: इसने कंपनी के व्यापारिक और राजनीतिक कार्यों को अलग-अलग कर दिया।
  7. राजनीति के लिए ‘बोर्ड ऑफ कंट्रोल’ और व्यापार के लिए ‘कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स’ बनाया गया।
  8. इसी एक्ट के साथ भारत में ‘द्वैध शासन’ (Dual Government) की शुरुआत हुई।
  9. भारत में कंपनी के अधीन क्षेत्र को पहली बार ‘ब्रिटिश आधिपत्य का क्षेत्र’ कहा गया।
  10. 1813 का चार्टर अधिनियम: इसने भारत में कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को समाप्त कर दिया (चाय और चीन के साथ व्यापार को छोड़कर)।
  11. इसके द्वारा ईसाई मिशनरियों को भारत आकर धर्म प्रचार की अनुमति दी गई।
  12. 1833 का चार्टर अधिनियम: यह ब्रिटिश भारत के ‘केंद्रीकरण’ की दिशा में अंतिम कदम था।
  13. बंगाल के गवर्नर जनरल को अब ‘भारत का गवर्नर जनरल’ बना दिया गया।
  14. लॉर्ड विलियम बेंटिक भारत के प्रथम गवर्नर जनरल बने।
  15. इसने मद्रास और बॉम्बे के गवर्नरों की विधायिका शक्ति छीन ली।
  16. ईस्ट इंडिया कंपनी अब पूर्ण रूप से एक प्रशासनिक निकाय बन गई।
  17. 1853 का चार्टर अधिनियम: इसने पहली बार गवर्नर जनरल की परिषद के ‘विधायी’ और ‘प्रशासनिक’ कार्यों को अलग किया।
  18. सिविल सेवकों की भर्ती के लिए खुली प्रतियोगिता शुरू करने का प्रावधान किया गया (मैकाले समिति, 1854)।
  19. इसने पहली बार भारतीय केंद्रीय विधान परिषद में स्थानीय प्रतिनिधित्व की शुरुआत की।
  20. 1858 का भारत सरकार अधिनियम: 1857 के विद्रोह के बाद कंपनी का शासन समाप्त कर सीधे ब्रिटिश क्राउन के हाथ में दे दिया गया।
  21. गवर्नर जनरल का पदनाम बदलकर वायसराय कर दिया गया।
  22. लॉर्ड कैनिंग भारत के पहले वायसराय बने।
  23. ‘बोर्ड ऑफ कंट्रोल’ और ‘कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स’ को समाप्त कर दिया गया।
  24. एक नया पद ‘भारत का राज्य सचिव’ बनाया गया, जिसकी सहायता के लिए 15 सदस्यीय परिषद थी।
  25. 1861 का भारत परिषद अधिनियम: वायसराय को आपातकाल में बिना परिषद की सलाह के अध्यादेश (Ordinance) जारी करने की शक्ति मिली।
  26. इसने कानून बनाने की प्रक्रिया में भारतीयों को शामिल करने की शुरुआत की।
  27. वायसराय द्वारा लॉर्ड कैनिंग ने 1859 में शुरू की गई ‘पोर्टफोलियो (विभागीय) प्रणाली’ को मान्यता दी।
  28. 1892 का अधिनियम: इसने विधान परिषदों के कार्यों में वृद्धि की और उन्हें बजट पर चर्चा करने की शक्ति दी।
  29. इसमें ‘चुनाव’ शब्द का प्रयोग नहीं हुआ, लेकिन सीमित रूप से निर्वाचन की प्रक्रिया शुरू हुई।
  30. 1909 का अधिनियम (मार्ले-मिंटो सुधार): लॉर्ड मार्ले भारत सचिव थे और लॉर्ड मिंटो वायसराय।
  31. इसने सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व की शुरुआत की (मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र)।
  32. लॉर्ड मिंटो को ‘सांप्रदायिक निर्वाचन के जनक’ के रूप में जाना जाने लगा।
  33. सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा वायसराय की कार्यपालिका परिषद में शामिल होने वाले पहले भारतीय बने।
  34. 1919 का अधिनियम (मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार): इसने केंद्र में द्विसदनीय व्यवस्था (लोकसभा और राज्यसभा) शुरू की।
  35. प्रांतों में ‘द्वैध शासन’ (Dyarchy) व्यवस्था लागू की गई।
  36. लोक सेवा आयोग (PSC) का गठन करने का प्रावधान इसी एक्ट में था (1926 में गठन)।
  37. पहली बार महिलाओं को वोट देने का अधिकार मिला।
  38. 1935 का भारत शासन अधिनियम: यह सबसे विस्तृत अधिनियम था जिससे भारतीय संविधान का 70% हिस्सा लिया गया है।
  39. इसने प्रांतों में द्वैध शासन समाप्त कर उन्हें ‘स्वायत्तता’ प्रदान की।
  40. केंद्र में द्वैध शासन प्रणाली शुरू की गई।
  41. एक संघीय न्यायालय (Federal Court) और RBI की स्थापना का प्रावधान किया गया।
  42. शक्तियों का विभाजन तीन सूचियों में हुआ: संघीय, प्रांतीय और समवर्ती।
  43. 1947 का भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम: इसने भारत को एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र घोषित किया।
  44. 15 अगस्त 1947 से भारत में ब्रिटिश शासन समाप्त हो गया।
  45. वायसराय का पद समाप्त कर दिया गया और गवर्नर जनरल का पद पुनः बनाया गया।

निष्कर्ष: शिक्षक की दृष्टि से (Final Takeaway)

भारतीय संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का अध्ययन केवल तारीखों और अधिनियमों को रटने का विषय नहीं है। एक शिक्षक और अभ्यर्थी के रूप में, हमें यह समझना होगा कि 1773 से 1947 तक की यह यात्रा वास्तव में भारतीयों के संघर्ष और अंग्रेजों द्वारा अपनी सत्ता को बनाए रखने के लिए किए गए प्रशासनिक प्रयोगों का एक लंबा सिलसिला है।

आज हम जिस सशक्त और जीवंत लोकतंत्र में सांस ले रहे हैं, उसकी जड़ें इन्हीं अधिनियमों में छिपी हैं। जहाँ 1773 के एक्ट ने पहली बार ‘लिखित प्रशासन’ की शुरुआत की, वहीं 1935 के अधिनियम ने हमें वह प्रशासनिक ढांचा प्रदान किया जिसे हमने आज़ादी के बाद भी अपनाया।

अभ्यर्थियों के लिए मेरी सलाह:

  1. परिवर्तन को पकड़ें: परीक्षा में अक्सर यह पूछा जाता है कि ‘बदलाव’ कहाँ हुआ? (जैसे: बंगाल का G.G. भारत का G.G. कब बना? या द्वैध शासन कब शुरू हुआ और कब खत्म?)
  2. लक्ष्मीकांत 8वें संस्करण का महत्व: नए संस्करण में जो सूक्ष्म बदलाव (जैसे- 1833 में सिविल सेवा का ‘प्रयास’) दिए गए हैं, वे ही अब UPSC और PCS के नए पैटर्न का आधार बन रहे हैं।
  3. अभ्यास ही सफलता है: केवल पढ़ने से काम नहीं चलेगा, लेख के अंत में दिए गए PYQs और Mock Test को ज़रूर हल करें।

संविधान की यह ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वास्तव में हमें सिखाती है कि ‘कानून का शासन’ (Rule of Law) क्रमिक विकास से आता है। आशा है कि ये नोट्स आपकी तैयारी को एक नई दिशा देंगे।

“परिश्रम ही सफलता की एकमात्र कुंजी है। पढ़ते रहिए, बढ़ते रहिए!”


🔥 परीक्षा में पूछे गए प्रश्न (PYQ)

🟢 प्रश्न 1. निम्नलिखित में से किस अधिनियम के द्वारा भारत में संघीय न्यायालय (Federal Court) की स्थापना का प्रावधान किया गया? (UPSC)

(A) 1919 का अधिनियम
(B) 1935 का अधिनियम
(C) 1909 का अधिनियम
(D) 1858 का अधिनियम

सही उत्तर: (B) 1935 का भारत शासन अधिनियम


🟢 प्रश्न 2.भारत में पृथक निर्वाचन (Separate Electorate) की शुरुआत किस अधिनियम से हुई? (SSC CGL)

(A) 1892
(B) 1909
(C) 1919
(D) 1935

सही उत्तर: (B) 1909 का मार्ले-मिंटो सुधार


🟢 प्रश्न 3. द्वैध शासन’ (Dyarchy) की व्यवस्था सर्वप्रथम किस अधिनियम में लागू की गई? (UPPSC)‘

(A) 1909
(B) 1919
(C) 1935
(D) 1858

सही उत्तर: (B) 1919 का मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार


🟢 प्रश्न 4.भारत में सिविल सेवा के लिए खुली प्रतियोगिता की व्यवस्था किस अधिनियम में की गई? (Railway)

(A) 1833
(B) 1853
(C) 1861
(D) 1919

सही उत्तर: (B) 1853 का चार्टर अधिनियम


🟢 प्रश्न 5.निम्नलिखित में से किस अधिनियम ने गवर्नर जनरल को ‘वायसराय’ में परिवर्तित किया? (UPSC)

(A) 1773
(B) 1833
(C) 1858
(D) 1909

सही उत्तर: (C) 1858 का भारत सरकार अधिनियम


🟢 प्रश्न 6. केंद्रीय एवं प्रांतीय विषयों का पृथक्करण किस अधिनियम के तहत हुआ? (BPSC)

(A) 1909
(B) 1919
(C) 1935
(D) 1858

सही उत्तर: (B) 1919 का अधिनियम


🟢 प्रश्न 7. निम्नलिखित में से किस अधिनियम को भारतीय संविधान का “Blueprint” कहा जाता है? (SSC)

(A) 1909
(B) 1919
(C) 1935
(D) 1947

सही उत्तर: (C) 1935 का भारत शासन अधिनियम


🟢 प्रश्न 8. भारत में पहली बार विधि आयोग (Law Commission) की स्थापना किस अधिनियम के अंतर्गत हुई? (UPSC)

(A) 1813
(B) 1833
(C) 1853
(D) 1919

सही उत्तर: (B) 1833 का चार्टर अधिनियम

FQA

Q1. भारतीय संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि कब से कब तक मानी जाती है?

1773 से 1947 तक।

Q2. 1935 का अधिनियम क्यों महत्वपूर्ण है?

इसी से भारतीय संविधान का लगभग 70% भाग लिया गया।

Q3. Separate Electorate कब शुरू हुआ?

1909 के अधिनियम से।

Q4. पहली बार सिविल सेवा में खुली प्रतियोगिता कब शुरू हुई?

1853 के चार्टर एक्ट के बाद।

Q5. भारतीय संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि कितने कालखंडों में बाँटी जाती है?

दो कालखंडों में – कंपनी शासन (1773–1858) और सम्राट शासन (1858–1947)।

Vikas Singh

लेखक: विकास सिंह

विकास सिंह 15+ वर्षों के शिक्षण अनुभव वाले General Studies (GS) शिक्षक हैं। उन्होंने GS Faculty के रूप में कार्य किया है तथा दो बार UPSC Mains परीक्षा में सम्मिलित हो चुके हैं। वे भारतीय राजव्यवस्था, इतिहास, भूगोल और सामान्य विज्ञान के विशेषज्ञ हैं। वर्तमान में वे वाराणसी में अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं और अपने YouTube चैनल Study2Study के माध्यम से शिक्षा जगत में योगदान दे रहे हैं।