राजा राममोहन राय और ब्रह्म समाज : भारतीय नवजागरण के अग्रदूत

19वीं शताब्दी के प्रारम्भ में भारतीय समाज अंधविश्वास, सामाजिक कुरीतियों और रूढ़िवाद से ग्रस्त था। सती प्रथा, बाल विवाह, बहुविवाह और स्त्री-शिक्षा का अभाव समाज की प्रगति में बाधक थे।
इसी संदर्भ में राजा राममोहन राय का उदय हुआ—जिन्होंने तर्क, मानवता और आधुनिक शिक्षा के बल पर भारतीय समाज को नई दिशा दी।

📌 उन्हें उचित ही “भारतीय नवजागरण का जनक” कहा जाता है।


राजा राममोहन राय : संक्षिप्त परिचय

  • जन्म: 1772, राधानगर (बंगाल)
  • मृत्यु: 1833, इंग्लैंड
  • भाषा-ज्ञान: संस्कृत, फारसी, अरबी, बंगाली, अंग्रेज़ी
  • परिचय: समाज सुधारक, दार्शनिक, शिक्षाविद, पत्रकार

राजा राममोहन राय आधुनिक भारत के पहले महान सामाजिक चिंतक थे, जिन्होंने पूर्वी दर्शन और पाश्चात्य तर्कवाद के बीच सेतु बनाया।


सामाजिक-धार्मिक विचार

राजा राममोहन राय के विचारों का केंद्र था—

  • एकेश्वरवाद
  • तर्क और विवेक
  • मानवतावाद
  • धर्म की नैतिक व्याख्या

उन्होंने मूर्तिपूजा, अंधविश्वास और पाखंड का विरोध किया तथा उपनिषदों के निर्गुण ब्रह्म की अवधारणा को प्रमुखता दी।


सती प्रथा उन्मूलन में भूमिका

पृष्ठभूमि

सती प्रथा स्त्रियों के जीवन पर सबसे क्रूर आघात थी। इसे धर्म के नाम पर वैध ठहराया जाता था।

योगदान

  • शास्त्रों के तर्कपूर्ण अध्ययन द्वारा सती का विरोध
  • जनमत निर्माण और ब्रिटिश प्रशासन पर दबाव
  • पर्चे, लेख और जनसभाएँ

📌 परिणामस्वरूप 1829 में सती प्रथा का उन्मूलन हुआ।

  • गवर्नर-जनरल: लॉर्ड विलियम बेंटिंक

यह सुधार भारतीय समाज के इतिहास में मील का पत्थर सिद्ध हुआ।


शिक्षा में योगदान

राजा राममोहन राय आधुनिक, वैज्ञानिक और तर्कपूर्ण शिक्षा के समर्थक थे।

प्रमुख पहल

  • अंग्रेज़ी शिक्षा का समर्थन
  • गणित, विज्ञान और दर्शन को बढ़ावा
  • हिंदू कॉलेज (1817) की स्थापना में सहयोग

उनका मत था कि शिक्षा समाज को अंधविश्वास से मुक्त करती है।


पत्रकारिता और सार्वजनिक चेतना

उन्होंने पत्रकारिता को समाज सुधार का माध्यम बनाया।

प्रमुख पत्र

  • संवाद कौमुदी (बंगाली)
  • मिरात-उल-अख़बार (फारसी)

इन पत्रों के माध्यम से उन्होंने स्वतंत्र अभिव्यक्ति, सामाजिक सुधार और प्रशासनिक आलोचना को बल दिया।


ब्रह्म समाज की स्थापना (1828)

स्थापना

  • 1828, कोलकाता
  • संस्थापक: राजा राममोहन राय

ब्रह्म समाज एक एकेश्वरवादी, तर्कसंगत और सुधारवादी आंदोलन था।


ब्रह्म समाज के सिद्धांत

  1. एक ईश्वर में विश्वास
  2. मूर्तिपूजा का विरोध
  3. सभी धर्मों का सम्मान
  4. नैतिक और सामाजिक शुद्धता
  5. स्त्री-पुरुष समानता

📌 इसका उद्देश्य धर्म को नैतिक और मानवतावादी रूप देना था।


ब्रह्म समाज के सामाजिक सुधार

प्रमुख सुधार

  • सती प्रथा का विरोध
  • विधवा पुनर्विवाह का समर्थन
  • स्त्री शिक्षा
  • जाति-भेद का विरोध

नेतृत्व परंपरा

राजा राममोहन राय के बाद आंदोलन को आगे बढ़ाया—

  • देवेन्द्रनाथ टैगोर
  • केशवचंद्र सेन

भारतीय नवजागरण में योगदान

राजा राममोहन राय और ब्रह्म समाज ने—

  • आधुनिक राष्ट्रवाद की वैचारिक नींव रखी
  • सामाजिक सुधार को राष्ट्रीय चेतना से जोड़ा
  • पाश्चात्य विचारों का रचनात्मक समावेश किया

📌 इसलिए उन्हें आधुनिक भारत का निर्माता भी कहा जाता है।


आलोचना और सीमाएँ

  • सुधार शहरी मध्यम वर्ग तक सीमित
  • ग्रामीण समाज पर सीमित प्रभाव
  • पारंपरिक समाज का विरोध

फिर भी, इनके प्रयासों ने सुधारों की श्रृंखला आरम्भ की।


ऐतिहासिक महत्व

समाज के लिए

  • सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार
  • स्त्री अधिकारों की नींव
  • तर्क और विवेक का प्रसार

राष्ट्र के लिए

  • आधुनिक राष्ट्रवाद की चेतना
  • सुधार और स्वतंत्रता के बीच संबंध

📌 राजा राममोहन राय के बिना भारतीय सामाजिक सुधार आंदोलन की कल्पना अधूरी है।


परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य

✔ ब्रह्म समाज स्थापना – 1828
✔ सती उन्मूलन – 1829
✔ राजा राममोहन राय – भारतीय नवजागरण के जनक
✔ हिंदू कॉलेज – 1817
✔ संवाद कौमुदी – पत्र


निष्कर्ष (Conclusion)

राजा राममोहन राय और ब्रह्म समाज ने भारतीय समाज को अंधविश्वास से विवेक, रूढ़ि से सुधार और परंपरा से आधुनिकता की ओर अग्रसर किया।
उनका योगदान केवल सामाजिक सुधार तक सीमित नहीं, बल्कि आधुनिक भारत की वैचारिक नींव है।

“जहाँ तर्क है, वहीं प्रगति है—और इस तर्क के अग्रदूत राजा राममोहन राय थे।”


FAQs (Frequently Asked Questions)

Q1. राजा राममोहन राय को भारतीय नवजागरण का जनक क्यों कहा जाता है?

क्योंकि उन्होंने तर्क, शिक्षा और सामाजिक सुधारों से आधुनिक चेतना जगाई।

Q2. ब्रह्म समाज का मुख्य उद्देश्य क्या था?

एकेश्वरवाद, सामाजिक सुधार और नैतिक धर्म की स्थापना।

Q3. सती प्रथा का उन्मूलन कब हुआ?

1829 में।

Q4. ब्रह्म समाज के प्रमुख नेता कौन थे?

देवेन्द्रनाथ टैगोर और केशवचंद्र सेन।

Q5. राजा राममोहन राय का सबसे बड़ा योगदान क्या था?

सती प्रथा उन्मूलन और आधुनिक शिक्षा का समर्थन।

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