कर्नाटक युद्ध और फ्रांसीसी पतन : भारत में अंग्रेजी साम्राज्य की आधारशिला

18वीं शताब्दी का भारत राजनीतिक रूप से अत्यंत अस्थिर था। मुगल साम्राज्य के पतन के बाद भारत में कोई केन्द्रीय शक्ति नहीं बची थी। विभिन्न क्षेत्रीय शासक आपस में संघर्ष कर रहे थे और इसी कमजोरी का लाभ उठाकर यूरोपीय शक्तियाँ भारत में अपने व्यापारिक हितों को राजनीतिक प्रभुत्व में बदलने लगीं।

इसी पृष्ठभूमि में अंग्रेजों और फ्रांसीसियों के बीच भारत में वर्चस्व की लड़ाई शुरू हुई। यह संघर्ष मुख्य रूप से दक्षिण भारत के कर्नाटक क्षेत्र में हुआ, इसलिए इतिहास में इसे कर्नाटक युद्ध (Carnatic Wars) कहा जाता है।

📌 इन युद्धों का ऐतिहासिक महत्व अत्यंत गहरा है, क्योंकि

  • इन्हीं युद्धों से भारत में अंग्रेजी शासन की नींव पड़ी
  • और फ्रांसीसी राजनीतिक शक्ति का भारत से लगभग पूर्ण पतन हो गया

कर्नाटक युद्ध क्या थे?

कर्नाटक युद्ध अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी और फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच हुए तीन प्रमुख युद्धों की श्रृंखला थे।
ये युद्ध वास्तव में यूरोप में चल रहे युद्धों का भारतीय विस्तार थे, जिनका उद्देश्य भारत में व्यापारिक नियंत्रण से आगे बढ़कर राजनीतिक प्रभुत्व स्थापित करना था।

युद्धअवधि
प्रथम कर्नाटक युद्ध1746–1748
द्वितीय कर्नाटक युद्ध1749–1754
तृतीय कर्नाटक युद्ध1756–1763

प्रथम कर्नाटक युद्ध (1746–1748)

कारण

  • यूरोप में ऑस्ट्रियाई उत्तराधिकार युद्ध का आरंभ
  • भारत में अंग्रेज और फ्रांसीसी कंपनियों के बीच व्यापारिक प्रतिस्पर्धा
  • दक्षिण भारत में कमजोर भारतीय शासक

प्रमुख घटनाएँ

  • फ्रांसीसी सेना ने मद्रास पर अधिकार कर लिया
  • कर्नाटक का नवाब अनवरुद्दीन फ्रांसीसियों से पराजित हुआ
  • इससे यह स्पष्ट हो गया कि भारतीय शासक यूरोपीय सेनाओं का सामना करने में अक्षम हैं

संधि

  • एक्स-ला-शापेल की संधि (1748)
  • इस संधि के तहत मद्रास अंग्रेजों को वापस कर दिया गया

परिणाम

✔ फ्रांसीसी शक्ति की सैन्य क्षमता सिद्ध हुई
✔ भारतीय शासकों की राजनीतिक कमजोरी उजागर हुई
✔ यूरोपीय शक्तियों का भारतीय राजनीति में हस्तक्षेप बढ़ा


द्वितीय कर्नाटक युद्ध (1749–1754)

कारण

  • हैदराबाद और कर्नाटक में उत्तराधिकार विवाद
  • यूरोपीय शक्तियों द्वारा भारतीय शासकों को समर्थन देकर सत्ता प्राप्त करने की कोशिश

प्रमुख व्यक्ति

  • डुप्ले – फ्रांसीसी गवर्नर
  • चंदा साहेब – फ्रांसीसी समर्थक
  • मुहम्मद अली – अंग्रेज समर्थक

प्रमुख घटनाएँ

  • अंबूर का युद्ध (1749) – निर्णायक मोड़
  • रॉबर्ट क्लाइव की आर्कोट विजय (1751) – अंग्रेजी रणनीति का उत्कृष्ट उदाहरण

परिणाम

✔ अंग्रेजों की सैन्य और राजनीतिक श्रेष्ठता सिद्ध
✔ फ्रांसीसी गवर्नर डुप्ले को फ्रांस वापस बुलाया गया
✔ भारत में अंग्रेजों का प्रभाव तेजी से बढ़ा

📌 द्वितीय कर्नाटक युद्ध को
👉 अंग्रेजी कूटनीति और सैन्य चतुराई का प्रतीक माना जाता है।


तृतीय कर्नाटक युद्ध (1756–1763)

कारण

  • यूरोप में सप्तवर्षीय युद्ध (Seven Years’ War)
  • इंग्लैंड और फ्रांस के बीच वैश्विक संघर्ष

प्रमुख घटनाएँ

  • वांडीवाश का युद्ध (1760) – निर्णायक युद्ध
  • फ्रांसीसी सेनापति – काउंट डी लैली
  • अंग्रेज सेनापति – आयर कूट

संधि

  • पेरिस की संधि (1763)

परिणाम

✔ भारत में फ्रांसीसी राजनीतिक शक्ति समाप्त
✔ फ्रांसीसी केवल कुछ व्यापारिक केंद्रों तक सीमित
✔ अंग्रेज भारत की सबसे शक्तिशाली यूरोपीय शक्ति बने


भारत में फ्रांसीसी पतन के कारण

  1. कमजोर और असंगठित नौसेना
  2. फ्रांसीसी सरकार का अपर्याप्त समर्थन
  3. डुप्ले जैसे कुशल प्रशासक को वापस बुलाना
  4. अंग्रेजों की बेहतर सैन्य और कूटनीतिक रणनीति
  5. भारतीय शासकों की आपसी फूट का अंग्रेजों द्वारा लाभ उठाना

कर्नाटक युद्धों का ऐतिहासिक महत्व

🔹 अंग्रेजों के लिए

  • भारत में राजनीतिक प्रभुत्व की शुरुआत
  • औपनिवेशिक प्रशासन का मार्ग प्रशस्त
  • आगे चलकर प्लासी और बक्सर जैसे युद्धों की पृष्ठभूमि

🔹 भारत के लिए

  • भारतीय शासकों की निर्भरता उजागर
  • विदेशी हस्तक्षेप में वृद्धि
  • औपनिवेशिक शासन की नींव पड़ी

📌 इसलिए कर्नाटक युद्धों को
👉 “भारत में अंग्रेजी साम्राज्य की आधारशिला” कहा जाता है।


परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य

✔ डुप्ले – फ्रांसीसी गवर्नर
✔ रॉबर्ट क्लाइव – आर्कोट विजय
✔ वांडीवाश का युद्ध – 1760
✔ पेरिस की संधि – 1763
✔ कर्नाटक युद्ध – कुल 3


निष्कर्ष (Conclusion)

कर्नाटक युद्ध केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं थे, बल्कि वे भारत के औपनिवेशिक भविष्य का निर्णायक मोड़ सिद्ध हुए।
इन युद्धों के बाद फ्रांसीसी शक्ति भारत से समाप्त हो गई और अंग्रेज निर्विवाद रूप से सबसे शक्तिशाली यूरोपीय शक्ति बनकर उभरे।

“कर्नाटक युद्धों ने भारत में सत्ता का संतुलन अंग्रेजों के पक्ष में कर दिया।”


FAQs (Frequently Asked Questions)

Q1. कर्नाटक युद्ध क्या थे?

कर्नाटक युद्ध अंग्रेजी और फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनियों के बीच हुए तीन युद्ध थे, जो भारत में वर्चस्व के लिए लड़े गए।

Q2. कर्नाटक युद्ध कहाँ लड़े गए थे?

ये युद्ध मुख्य रूप से दक्षिण भारत के कर्नाटक क्षेत्र में लड़े गए।

Q3. कर्नाटक युद्धों की संख्या कितनी थी?

कुल तीन कर्नाटक युद्ध हुए थे।

Q4. फ्रांसीसी पतन का मुख्य कारण क्या था?

कमजोर नौसेना, सरकारी समर्थन की कमी और अंग्रेजों की बेहतर रणनीति।

Q5. कर्नाटक युद्धों का सबसे महत्वपूर्ण युद्ध कौन-सा था?

वांडीवाश का युद्ध (1760), जिसने फ्रांसीसी शक्ति का अंत कर दिया।

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