प्रथम विश्व युद्ध मानव सभ्यता के इतिहास में एक ऐसा मोड़ था जिसने दुनिया के राजनीतिक नक्शे को हमेशा के लिए बदल दिया। इसे ‘महान युद्ध’ (The Great War) के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इससे पहले मानव इतिहास में कभी भी इतने बड़े पैमाने पर तबाही नहीं हुई थी। यह युद्ध 28 जुलाई 1914 से 11 नवंबर 1918 तक चला, जिसमें दुनिया की दो-तिहाई जनसंख्या प्रभावित हुई।
1. युद्ध की पृष्ठभूमि और दो प्रमुख गुट
प्रथम विश्व युद्ध मात्र दो देशों की लड़ाई नहीं थी, बल्कि यह वैश्विक शक्तियों का टकराव था। पूरी दुनिया दो प्रमुख गुटों में विभाजित हो गई थी:
- मित्र राष्ट्र (Allied Powers): इसमें मुख्य रूप से ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, इटली और बाद में संयुक्त राज्य अमेरिका (1917 में शामिल) शामिल थे।
- धुरी राष्ट्र / केंद्रीय शक्तियाँ (Central Powers): इसमें जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी साम्राज्य और ओटोमन साम्राज्य (तुर्की) प्रमुख थे।
2. युद्ध के मुख्य कारण (Causes of World War I)
इतिहासकार मानते हैं कि युद्ध केवल एक घटना की वजह से नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे दशकों से चली आ रही प्रतिद्वंद्विता थी।
(A) साम्राज्यवाद और आर्थिक प्रतिस्पर्धा
19वीं शताब्दी के अंत में यूरोप की प्रमुख शक्तियाँ (ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी) एशिया और अफ्रीका में अपने उपनिवेशों का विस्तार करने के लिए आपस में लड़ रही थीं। जर्मनी के औद्योगिक विकास ने ब्रिटेन के व्यापारिक दबदबे को चुनौती दी, जिससे तनाव बढ़ा।
(B) उग्र राष्ट्रवाद
यूरोप के बाल्कन क्षेत्र में राष्ट्रवाद की लहर दौड़ रही थी। सर्बिया जैसे देश ‘ग्रेटर सर्बिया’ का निर्माण करना चाहते थे, जिससे ऑस्ट्रिया-हंगरी साम्राज्य को अपने अस्तित्व का खतरा महसूस होने लगा।
(C) सैन्य गठबंधन (Secret Alliances)
यूरोपीय देशों ने एक-दूसरे के विरुद्ध गुप्त संधियाँ कर रखी थीं। ‘ट्रिपल एलायंस’ (जर्मनी, ऑस्ट्रिया, इटली) और ‘ट्रिपल एंटेंट’ (ब्रिटेन, फ्रांस, रूस) ने ऐसी स्थिति पैदा कर दी थी कि यदि दो देशों में भी युद्ध होता, तो पूरी दुनिया उसमें खिंची चली आती।
(D) तात्कालिक कारण: साराजेवो हत्याकांड
28 जून 1914 को ऑस्ट्रिया-हंगरी के राजकुमार आर्कड्यूक फ्रांसिस फर्डिनेंड की हत्या बोस्निया की राजधानी साराजेवो में कर दी गई। हत्यारा एक सर्बियाई राष्ट्रवादी संगठन ‘ब्लैक हैंड’ का सदस्य गैव्रिलो प्रिंसिप था। इस घटना ने बारूद के ढेर में चिंगारी का काम किया।
3. युद्ध के प्रमुख चरण और घटनाएँ (1914–1918)
युद्ध के चार वर्षों के दौरान कई ऐसी घटनाएँ हुईं जिन्होंने आधुनिक युद्ध कौशल को बदल दिया।
ट्रेंच वारफेयर (खाई युद्ध)
पश्चिमी मोर्चे पर सैनिकों ने मीलों लंबी खाइयाँ खोदीं। यह युद्ध का सबसे कठिन हिस्सा था जहाँ सैनिक महीनों तक गंदगी, बीमारी और मौत के साये में रहते थे।
नई तकनीकों का प्रयोग
प्रथम विश्व युद्ध में पहली बार टैंकों, विमानों, पनडुब्बियों (U-boats) और सबसे घातक जहरीली गैस (Gas Warfare) का उपयोग किया गया।
रूस की वापसी और अमेरिका का प्रवेश (1917)
1917 युद्ध का सबसे निर्णायक वर्ष था। रूस में ‘बोल्शेविक क्रांति’ हुई जिसके बाद रूस ने युद्ध से हाथ खींच लिए। उसी समय, जर्मनी की पनडुब्बियों द्वारा अमेरिकी जहाजों को डुबाने के कारण अमेरिका युद्ध में शामिल हो गया, जिसने मित्र राष्ट्रों का पलड़ा भारी कर दिया।
4. वर्साय की संधि और युद्ध का अंत
11 नवंबर 1918 को जर्मनी ने युद्ध विराम संधि पर हस्ताक्षर किए। लेकिन शांति की असली शर्तें 28 जून 1919 को वर्साय की संधि में तय की गईं।
वर्साय की संधि की प्रमुख शर्तें:
- क्षेत्रीय नुकसान: जर्मनी को अपने क्षेत्रों का एक बड़ा हिस्सा और अपने सभी उपनिवेश गंवाने पड़े।
- सैन्य कटौती: जर्मनी की सेना को 1 लाख तक सीमित कर दिया गया और उसे वायुसेना रखने से मना कर दिया गया।
- आर्थिक दंड: जर्मनी पर 6.6 अरब पाउंड का भारी युद्ध हर्जाना लगाया गया।
- युद्ध का दोष: संधि की धारा 231 (War Guilt Clause) के तहत जर्मनी को युद्ध के लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया गया।
5. भारत पर प्रथम विश्व युद्ध का प्रभाव
भले ही भारत इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल नहीं था, लेकिन ब्रिटिश उपनिवेश होने के कारण भारतीय सैनिकों ने दुनिया भर के मोर्चों पर लड़ाई लड़ी।
- लगभग 13 लाख भारतीय सैनिकों ने इस युद्ध में भाग लिया।
- 74,000 से अधिक भारतीय सैनिक शहीद हुए। उनकी याद में ही दिल्ली में ‘इंडिया गेट’ का निर्माण किया गया।
- युद्ध के बाद भारत में महंगाई और करों (Tax) में वृद्धि हुई, जिससे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को बल मिला।
6. युद्ध के परिणाम (Consequences)
प्रथम विश्व युद्ध ने पूरी दुनिया का सामाजिक और राजनीतिक ढांचा बदल दिया:
- साम्राज्यों का पतन: रूसी, जर्मन, ऑस्ट्रिया-हंगरी और ओटोमन साम्राज्य हमेशा के लिए खत्म हो गए।
- नए देशों का उदय: पोलैंड, फिनलैंड, एस्टोनिया, लातविया, लिथुआनिया, चेकोस्लोवाकिया और यूगोस्लाविया जैसे नए राष्ट्रों का निर्माण हुआ।
- राष्ट्र संघ (League of Nations): भविष्य में युद्ध रोकने के लिए 1920 में इस संस्था की स्थापना हुई।
- महिलाओं की स्थिति में बदलाव: पुरुष युद्ध पर थे, इसलिए महिलाओं ने कारखानों और कार्यालयों में काम करना शुरू किया, जिससे महिला सशक्तिकरण और मताधिकार (Right to Vote) की मांग बढ़ी।
7. Exam Oriented One-liners (Quick Revision)
- अवधि: 28 जुलाई 1914 – 11 नवंबर 1918 (कुल 4 साल, 3 महीने, 11 दिन)।
- कुल देश: 37 देशों ने हिस्सा लिया।
- यूएसए का प्रवेश: 6 अप्रैल 1917।
- युद्ध विराम: 11 नवंबर 1918 को सुबह 11 बजे।
- प्रमुख नारा: “The war to end all wars.”
- भारत के वायसराय: लॉर्ड हार्डिंग II।
- वर्साय की संधि: 28 जून 1919।
💡 निष्कर्ष (Conclusion)
प्रथम विश्व युद्ध केवल एक सैन्य संघर्ष नहीं था, बल्कि इसने मानवता को भारी क्षति पहुँचाई। वर्साय की संधि की कठोर शर्तों ने जर्मनी में अपमान की भावना पैदा की, जिसने अंततः ‘एडोल्फ हिटलर’ के उदय और द्वितीय विश्व युद्ध का मार्ग प्रशस्त किया।