शीत युद्ध (Cold War) क्या था? कारण, क्यूबा संकट और सोवियत संघ का पतन | UPSC Notes

द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद दुनिया ने राहत की सांस ली ही थी कि एक नए प्रकार का संघर्ष शुरू हो गया, जिसे ‘शीत युद्ध’ कहा जाता है। यह युद्ध हथियारों से नहीं, बल्कि विचारधाराओं, कूटनीति, जासूसी और मनोवैज्ञानिक प्रचार के माध्यम से लड़ा गया। यह मुख्य रूप से दो महाशक्तियों— संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) और सोवियत संघ (USSR) के बीच का संघर्ष था।

1. शीत युद्ध का अर्थ क्या है?

‘शीत युद्ध’ शब्द का सबसे पहले प्रयोग बर्नार्ड बारूक ने किया था, लेकिन इसे लोकप्रिय बनाने का श्रेय वाल्टर लिपमैन को जाता है। यह एक ऐसी स्थिति थी जहाँ न तो पूर्ण शांति थी और न ही वास्तविक युद्ध, बल्कि युद्ध जैसा तनाव हमेशा बना रहता था।


2. शीत युद्ध के मुख्य कारण

शीत युद्ध की जड़ें द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ही जम चुकी थीं।

(A) वैचारिक मतभेद

यह सबसे बड़ा कारण था।

  • अमेरिका: पूंजीवाद (Capitalism) और लोकतंत्र का समर्थक था।
  • सोवियत संघ: साम्यवाद (Communism) और एकदलीय शासन का समर्थक था।

(B) परमाणु हथियारों की होड़

अमेरिका द्वारा 1945 में परमाणु बम का सफल प्रयोग करने के बाद सोवियत संघ में असुरक्षा की भावना पैदा हुई। इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे से अधिक शक्तिशाली हथियार बनाने की दौड़ शुरू कर दी।

(C) सोवियत संघ द्वारा समझौतों का उल्लंघन

अमेरिका का मानना था कि स्टालिन ने याल्टा और पोर्ट्सडैम सम्मेलनों के वादों को तोड़कर पूर्वी यूरोप में जबरन साम्यवादी सरकारें स्थापित की हैं।

(D) ट्रूमैन सिद्धांत और मार्शल योजना

अमेरिका ने यूरोप को साम्यवाद से बचाने के लिए आर्थिक मदद (मार्शल योजना) देना शुरू किया, जिसे रूस ने अपनी घेराबंदी माना।


3. शीत युद्ध की प्रमुख घटनाएँ और चरण

(A) बर्लिन की नाकेबंदी (1948)

सोवियत संघ ने पश्चिमी बर्लिन के जमीनी रास्तों को बंद कर दिया। अमेरिका ने हवाई जहाज के जरिए वहां सामान पहुँचाया। यह शीत युद्ध के शुरुआती सबसे तनावपूर्ण पलों में से एक था।

(B) सैन्य गठबंधनों का निर्माण

  • NATO (1949): अमेरिका के नेतृत्व में पश्चिमी देशों का सैन्य संगठन।
  • Warsaw Pact (1955): सोवियत संघ के नेतृत्व में साम्यवादी देशों का जवाबी गठबंधन।

(C) कोरियाई युद्ध (1950-53)

उत्तर कोरिया (रूस समर्थित) और दक्षिण कोरिया (अमेरिका समर्थित) के बीच युद्ध हुआ, जिसने शीत युद्ध को एशिया तक फैला दिया।

(D) क्यूबा मिसाइल संकट (1962) – सबसे खतरनाक मोड़

सोवियत संघ ने अमेरिका के पास स्थित क्यूबा में अपनी मिसाइलें तैनात कर दीं। 13 दिनों तक दुनिया परमाणु युद्ध के मुहाने पर खड़ी थी। अंततः सूझबूझ से यह संकट टला।


4. गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) और भारत की भूमिका

जब दुनिया दो गुटों में बंट रही थी, तब भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, मिस्र के नासिर और युगोस्लाविया के टीटो ने ‘गुटनिरपेक्ष आंदोलन’ की शुरुआत की।

  • भारत ने किसी भी गुट में शामिल न होने का फैसला किया।
  • भारत का उद्देश्य स्वतंत्र विदेश नीति अपनाना और विश्व शांति को बढ़ावा देना था।

5. शीत युद्ध का अंत और सोवियत संघ का विघटन (1991)

1980 के दशक के अंत में सोवियत संघ की आर्थिक स्थिति खराब होने लगी।

  • मिखाइल गोर्बाचेव ने ‘ग्लासनोस्त’ (खुलापन) और ‘पेरेस्त्रोइका’ (पुनर्गठन) जैसी नीतियां लागू कीं।
  • 1989 में बर्लिन की दीवार गिर गई, जो शीत युद्ध के अंत का प्रतीक बनी।
  • 1991 में सोवियत संघ 15 नए देशों में टूट गया और इसी के साथ शीत युद्ध आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया।

📝 UPSC / SSC Exam Oriented One-liners

  • शीत युद्ध की अवधि 1945 से 1991 तक मानी जाती है।
  • ‘आयरन कर्टन’ (Iron Curtain) शब्द का प्रयोग विंस्टन चर्चिल ने किया था।
  • अंतरिक्ष की दौड़ (Space Race) शीत युद्ध का ही एक हिस्सा थी।
  • SALT और START जैसी संधियाँ परमाणु हथियारों को कम करने के लिए की गई थीं।
  • शीत युद्ध के दौरान दुनिया ‘द्विध्रुवीय’ (Bipolar) बन गई थी।