भारत में डचों का आगमन और विस्तार (1602–1759)- Spectrum Modern History Notes Hindi

डचों का आगमन : पुर्तगालियों के बाद भारत आने वाली दूसरी यूरोपीय शक्ति डच (हॉलैंड या वर्तमान नीदरलैंड के निवासी) थे। इनका मुख्य उद्देश्य भारत से सूती वस्त्र और इंडोनेशिया (मसाला द्वीप) से मसालों का व्यापार करना था।


🏛️ भाग 2: मास्टर वन-लाइनर्स

1. कंपनी की स्थापना और संरचना

  • स्थापना (1602): डच संसद के एक चार्टर द्वारा ‘वेरिनीगडे ओस्ट-इंडिसे कंपनी’ (VOC) की स्थापना हुई। यह दुनिया की पहली ऐसी कंपनी थी जिसने अपने शेयर (Stocks) जारी किए।
  • सरकारी नियंत्रण: ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी (EIC) के विपरीत, डच कंपनी पर उनकी सरकार का सीधा और अत्यधिक नियंत्रण था।
  • कार्नेलियस डी हाउटमैन (1596): यह भारत और सुमात्रा पहुँचने वाला पहला डच नागरिक था।

2. भारत में व्यापारिक केंद्र (Factories)

  • मछलीपट्टनम (1605): डचों ने अपनी पहली व्यापारिक कोठी आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम में स्थापित की।
  • पुलीकट (1610): यहाँ डचों ने अपना मुख्यालय बनाया और ‘पैगोडा’ नामक सोने के सिक्के जारी किए।
  • सूरत (1616): पश्चिमी भारत में व्यापार के लिए सूरत एक बड़ा केंद्र बना।
  • चिनसुरा (1653): बंगाल में डचों का सबसे मजबूत किला ‘गुस्तावस फोर्ट’ चिनसुरा में बनाया गया।
  • अन्य केंद्र: विमलीपत्तनम, कासिमबाजार, पटना, बालासोर, नागापट्टनम (1690 में पुलीकट की जगह मुख्यालय बना)।

3. डच व्यापार की अनूठी विशेषताएं

  • वस्त्रों का निर्यात: भारत को ‘सूती वस्त्रों के निर्यात का केंद्र’ बनाने का श्रेय डचों को ही जाता है। उन्होंने भारतीय नील, शोर (Saltpetre), रेशम और चावल का भी निर्यात किया।
  • मसाला द्वीप (Indonesia): डचों की मुख्य रुचि भारत की तुलना में इंडोनेशिया के मसाला द्वीपों पर अधिक थी।
  • कार्टेल व्यवस्था: डचों ने व्यापार में एकाधिकार बनाए रखने के लिए स्थानीय शासकों के साथ मिलकर व्यापारिक गठजोड़ किया।

4. डच-अंग्रेज संघर्ष और पतन

  • अम्बायना का हत्याकांड (1623): इंडोनेशिया के अम्बायना में डचों ने 10 अंग्रेजों की हत्या कर दी, जिससे दोनों शक्तियों के बीच शत्रुता चरम पर पहुँच गई।
  • बेदरा का युद्ध (1759): यह डचों के लिए अंतिम कील साबित हुआ। इस युद्ध में अंग्रेजों (लॉर्ड क्लाइव) ने डचों को बुरी तरह हराया, जिसके बाद भारत में डचों की शक्ति लगभग समाप्त हो गई।
  • पतन के कारण: 1. कंपनी पर सरकार का अत्यधिक दबाव।2. डचों का मुख्य ध्यान इंडोनेशिया पर होना।3. अंग्रेजों की नौसेना का बहुत अधिक शक्तिशाली होना।

⚡ Quick Revision Box (छात्रों के लिए कीमती तिजोरी)

महत्वपूर्ण तथ्यविवरण
पहली फैक्ट्रीमछलीपट्टनम (1605)
मुख्यालयपुलीकट (बाद में नागापट्टनम)
सोने के सिक्केपैगोडा (पुलीकट से जारी)
निर्णायक हारबेदरा का युद्ध (1759) बनाम अंग्रेज
मुख्य देनभारतीय वस्त्रों को विश्व स्तर पर प्रसिद्ध करना

📊 तुलनात्मक तालिका: डच बनाम पुर्तगाली

विशेषतापुर्तगालीडच
उद्देश्यधर्म प्रचार + मसाला व्यापारकेवल व्यापार (मुख्यतः वस्त्र और मसाले)
मुख्यालयगोवापुलीकट / नागापट्टनम
प्रमुख शक्तिमजबूत नौसेना (Blue Water)कुशल व्यापारी और शेयरधारक
अंत1961 में आजादी1759 बेदरा के युद्ध के बाद व्यापार तक सीमित

📝 UPSC/SSC PYQ Section (विगत वर्षों के प्रश्न)

  • UPSC Prelims: “किस यूरोपीय शक्ति ने भारत को सूती वस्त्रों के निर्यात का मुख्य केंद्र बनाया?” (उत्तर: डच)
  • SSC CGL: “बेदरा का युद्ध (1759) किन दो शक्तियों के बीच लड़ा गया था?” (उत्तर: डच और अंग्रेज)
  • UPSC Prelims: “डचों ने बंगाल में अपनी पहली फैक्ट्री कहाँ स्थापित की थी?” (उत्तर: पीपली, 1627 – बाद में चिनसुरा)
  • SSC: “डच ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना कब हुई?” (उत्तर: 1602)