ब्रिटिश शासन के दौरान भारत की गरीबी केवल प्राकृतिक या प्रशासनिक कारणों से नहीं थी, बल्कि यह एक सुनियोजित आर्थिक शोषण का परिणाम थी।
भारत से निरंतर धन का प्रवाह इंग्लैंड की ओर किया गया, बिना किसी समुचित प्रतिफल के। इस प्रक्रिया को ही धन का निष्कासन (Drain of Wealth) कहा जाता है।
📌 इस अवधारणा ने पहली बार यह स्पष्ट किया कि
👉 ब्रिटिश शासन भारत के लिए विकासकारी नहीं, बल्कि शोषणकारी था।
धन का निष्कासन क्या है?
धन का निष्कासन वह प्रक्रिया थी, जिसमें—
- भारत की आय
- संसाधन
- कर
- लाभ
बिना किसी समान लाभ के ब्रिटेन भेज दिए जाते थे।
📌 यह निष्कासन
✔ निरंतर
✔ एकतरफा
✔ गैर-उत्पादक
था।
धन के निष्कासन की अवधारणा के प्रवर्तक
प्रमुख विचारक
- दादाभाई नौरोजी
उन्होंने अपनी प्रसिद्ध कृति
👉 Poverty and Un-British Rule in India
में धन के निष्कासन की अवधारणा को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया।
धन के निष्कासन के प्रमुख स्रोत
1️⃣ प्रशासनिक व्यय
- अंग्रेज अधिकारियों के वेतन
- पेंशन
- भत्ते
ये सभी भारत की आय से दिए जाते थे, लेकिन खर्च ब्रिटेन में होता था।
2️⃣ होम चार्जेज (Home Charges)
होम चार्जेज वे खर्च थे, जिनका भुगतान भारत से ब्रिटेन को किया जाता था—
- ब्रिटिश सेना का खर्च
- भारत सचिव कार्यालय का व्यय
- रेलवे और सार्वजनिक ऋण पर ब्याज
📌 यह धन निष्कासन का सबसे बड़ा स्रोत था।
3️⃣ व्यापारिक शोषण
- भारत से कच्चा माल निर्यात
- ब्रिटेन से तैयार माल आयात
- भारत को व्यापार घाटा
📌 लाभ ब्रिटिश व्यापारियों को मिलता था।
4️⃣ निजी पूंजी निष्कासन
- अंग्रेज व्यापारियों और अधिकारियों की बचत
- लाभ और निवेश ब्रिटेन भेजे जाते थे
- भारत में पुनर्निवेश नहीं
5️⃣ युद्ध व्यय
- ब्रिटिश युद्धों का खर्च भारत से
- अफगान युद्ध, बर्मा युद्ध आदि
धन के निष्कासन की विशेषताएँ
✔ बिना प्रतिफल
✔ गैर-उत्पादक
✔ दीर्घकालिक
✔ भारत की आंतरिक अर्थव्यवस्था को कमजोर करने वाला
भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
आर्थिक प्रभाव
- पूंजी निर्माण में कमी
- उद्योगों का पतन
- कृषि का पिछड़ापन
सामाजिक प्रभाव
- गरीबी और बेरोजगारी
- अकाल और भुखमरी
- जीवन स्तर में गिरावट
राजनीतिक प्रभाव
- राष्ट्रीय चेतना का विकास
- ब्रिटिश शासन के विरुद्ध असंतोष
- भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को वैचारिक आधार
📌 धन का निष्कासन
👉 भारतीय गरीबी का मुख्य कारण माना गया।
राष्ट्रवादी आंदोलन में महत्व
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इसे अपना प्रमुख मुद्दा बनाया
- आर्थिक राष्ट्रवाद की नींव
- स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलनों को बल
📌 इस सिद्धांत ने
👉 ब्रिटिश शासन की नैतिक वैधता को चुनौती दी।
ब्रिटिश पक्ष की आलोचना
ब्रिटिश अर्थशास्त्रियों ने कहा—
- यह भुगतान सेवाओं के बदले था
- भारत को सुरक्षा और प्रशासन मिला
📌 लेकिन भारतीय राष्ट्रवादियों ने तर्क दिया कि—
👉 यह सेवाएँ भारत के हित में नहीं थीं।
धन के निष्कासन का ऐतिहासिक महत्व
भारत के लिए
- आर्थिक पिछड़ेपन की व्याख्या
- राष्ट्रीय आंदोलन को वैचारिक शक्ति
- आर्थिक सुधारों की माँग
इतिहास के लिए
- औपनिवेशिक अर्थशास्त्र की समझ
- ब्रिटिश शासन की वास्तविक प्रकृति उजागर
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य
✔ धन का निष्कासन – दादाभाई नौरोजी
✔ प्रमुख कृति – Poverty and Un-British Rule in India
✔ होम चार्जेज – मुख्य स्रोत
✔ आर्थिक राष्ट्रवाद – आधार
निष्कर्ष (Conclusion)
धन का निष्कासन केवल एक आर्थिक अवधारणा नहीं, बल्कि
👉 ब्रिटिश शासन की शोषणकारी आत्मा का प्रमाण है।
इस सिद्धांत ने यह स्पष्ट किया कि भारत की गरीबी किसी प्राकृतिक कारण से नहीं, बल्कि एक संगठित औपनिवेशिक नीति का परिणाम थी।
“भारत की गरीबी ब्रिटिश शासन की देन थी, न कि भारतीय समाज की अक्षमता।”
FAQs (Frequently Asked Questions)
Q1. धन का निष्कासन क्या है?
भारत से ब्रिटेन को बिना प्रतिफल धन के निरंतर प्रवाह की प्रक्रिया।
Q2. इस सिद्धांत के प्रवर्तक कौन थे?
दादाभाई नौरोजी।
Q3. होम चार्जेज क्या थे?
भारत द्वारा ब्रिटेन को दिए जाने वाले प्रशासनिक और सैन्य खर्च।
Q4. धन के निष्कासन का सबसे बड़ा प्रभाव क्या था?
भारतीय गरीबी और आर्थिक पिछड़ापन।
Q5. यह सिद्धांत क्यों महत्वपूर्ण है?
क्योंकि इसने ब्रिटिश शासन के आर्थिक शोषण को उजागर किया।