भारतीय संविधान भारत की सामाजिक, सांस्कृतिक, भौगोलिक और ऐतिहासिक विविधताओं को ध्यान में रखते हुए समानता के साथ-साथ विशेषता के सिद्धांत को अपनाता है। इसी दर्शन के अंतर्गत संविधान में कुछ राज्यों को उनकी विशिष्ट परिस्थितियों—जैसे जनजातीय संरचना, सांस्कृतिक पहचान, भौगोलिक अलगाव और विकासात्मक असंतुलन—के कारण कुछ राज्यों के लिए विशेष प्रावधान प्रदान किए गए हैं। भारतीय संविधान के भाग XXI (21) के अंतर्गत अनुच्छेद 371 से 371-J तक कुछ राज्यों के लिए विशेष प्रावधान दिए गए हैं। ये प्रावधान उन राज्यों की सांस्कृतिक पहचान, जनजातीय अधिकारों और पिछड़े क्षेत्रों के विकास को सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं।
कुछ राज्यों के लिए विशेष प्रावधान भारतीय संघवाद की Asymmetrical Federalism की अवधारणा को दर्शाते हैं, जहाँ सभी राज्यों पर समान नियम लागू करने के बजाय उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप अलग-अलग संवैधानिक संरक्षण दिए गए हैं। नागालैंड और मिजोरम में प्रथागत कानूनों व भूमि अधिकारों की रक्षा, महाराष्ट्र-गुजरात में क्षेत्रीय विकास बोर्ड, आंध्र प्रदेश/तेलंगाना में स्थानीय आरक्षण तथा कर्नाटक के कल्याण-कर्नाटक क्षेत्र के लिए विशेष विकास प्रावधान—ये सभी इसी नीति का परिणाम हैं।
I. सामान्य परिचय (General Introduction)
- भारतीय संविधान के भाग XXI (21) में ‘अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष प्रावधान’ शामिल हैं।
- अनुच्छेद 371 से 371-J तक कुल 11 राज्यों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
- इन प्रावधानों का मुख्य उद्देश्य पिछड़े क्षेत्रों का विकास और जनजातीय संस्कृति का संरक्षण है।
- मूल संविधान में केवल अनुच्छेद 371 (महाराष्ट्र और गुजरात) का वर्णन था।
- बाकी सभी अनुच्छेद विभिन्न संविधान संशोधनों के माध्यम से बाद में जोड़े गए।
II. अनुच्छेद वार महत्वपूर्ण तथ्य (Article-wise One-Liners)
अनुच्छेद 371: महाराष्ट्र और गुजरात
- राष्ट्रपति महाराष्ट्र के विदर्भ और मराठवाड़ा के लिए अलग विकास बोर्ड बना सकते हैं।
- गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्रों के लिए विशेष विकास बोर्ड का प्रावधान है।
- इन क्षेत्रों में तकनीकी शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए पर्याप्त सुविधाएं सुनिश्चित की जाती हैं।
अनुच्छेद 371-A: नागालैंड (13वां संशोधन, 1962)
- नागालैंड की धार्मिक और सामाजिक प्रथाओं में संसद का कोई कानून तब तक लागू नहीं होगा जब तक राज्य विधानसभा सहमति न दे।
- नागा प्रथागत कानून (Customary Law) और दीवानी/फौजदारी न्याय को सुरक्षा प्राप्त है।
- त्वेनसांग जिला: यहाँ के प्रशासन के लिए 35 सदस्यीय क्षेत्रीय परिषद का गठन किया गया है।
अनुच्छेद 371-B और 371-C: असम और मणिपुर
- 371-B (असम): राष्ट्रपति असम विधानसभा की एक समिति बना सकते हैं जिसमें जनजातीय क्षेत्रों के प्रतिनिधि हों।
- 371-C (मणिपुर): मणिपुर के पहाड़ी क्षेत्रों के लिए एक विशेष विधायी समिति का प्रावधान है।
- राज्यपाल को इन पहाड़ी क्षेत्रों के प्रशासन पर राष्ट्रपति को वार्षिक रिपोर्ट देनी होती है।
अनुच्छेद 371-D और 371-E: आंध्र प्रदेश और तेलंगाना
- 371-D: स्थानीय लोगों को नौकरियों और शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए ‘स्थानीय कैडर’ की व्यवस्था।
- 371-E: संसद को आंध्र प्रदेश में केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने की शक्ति प्रदान करता है।
अनुच्छेद 371-F: सिक्किम (36वां संशोधन, 1975)
- सिक्किम विधानसभा में कम से कम 32 सदस्य होने अनिवार्य हैं।
- सिक्किम की विभिन्न वर्गों की जनसंख्या के अधिकारों की रक्षा के लिए सीटों का आरक्षण किया गया है।
अनुच्छेद 371-G, 371-H और 371-I: मिज़ोरम, अरुणाचल और गोवा
- 371-G (मिज़ोरम): मिज़ो लोगों की भूमि और संस्कृति का संरक्षण (विधानसभा में कम से कम 40 सदस्य)।
- 371-H (अरुणाचल प्रदेश): राज्य में कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्यपाल को विशेष जिम्मेदारी।
- 371-I (गोवा): गोवा विधानसभा की सदस्य संख्या कम से कम 30 निश्चित की गई है।
अनुच्छेद 371-J: कर्नाटक (98वां संशोधन, 2012)
- हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र के छह पिछड़े जिलों (गुलबर्गा, बीदर, रायचूर, कोप्पल, यादगिर और बेल्लारी) के लिए विशेष प्रावधान।
- इन क्षेत्रों के निवासियों को नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण का लाभ मिलता है।
III. त्वरित रिवीज़न टेबल (Quick Revision Table)
| अनुच्छेद | राज्य | मुख्य उद्देश्य |
| 371 | महाराष्ट्र, गुजरात | विकास बोर्डों का गठन |
| 371-A | नागालैंड | नागा संस्कृति और प्रथागत कानून का संरक्षण |
| 371-B | असम | जनजातीय क्षेत्रों के लिए समिति |
| 371-C | मणिपुर | पहाड़ी क्षेत्रों का प्रशासन |
| 371-D | आंध्र/तेलंगाना | शिक्षा और रोजगार में अवसर |
| 371-F | सिक्किम | विलय की शर्तें और क्षेत्रीय शांति |
| 371-G | मिज़ोरम | मिज़ो धार्मिक और सामाजिक अधिकार |
| 371-H | अरुणाचल प्रदेश | राज्यपाल की विशेष जिम्मेदारी (कानून व्यवस्था) |
| 371-J | कर्नाटक | हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र का विकास |
❓ Frequently Asked Questions (FAQs)
1. कुछ राज्यों के लिए विशेष प्रावधान क्या हैं?
कुछ राज्यों के लिए विशेष प्रावधान वे संवैधानिक व्यवस्थाएँ हैं, जो उनकी विशिष्ट ऐतिहासिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए दी गई हैं।
2. भारतीय संविधान में ये विशेष प्रावधान किन अनुच्छेदों में दिए गए हैं?
ये प्रावधान मुख्य रूप से अनुच्छेद 371 से 371J के अंतर्गत दिए गए हैं।
3. कुछ राज्यों के लिए विशेष प्रावधान देने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इनका उद्देश्य राष्ट्रीय एकता बनाए रखते हुए क्षेत्रीय विविधताओं की रक्षा, जनजातीय हितों का संरक्षण और विकासात्मक असंतुलन को कम करना है।
4. अनुच्छेद 371 किन राज्यों से संबंधित है?
अनुच्छेद 371 महाराष्ट्र और गुजरात से संबंधित है, जिसमें क्षेत्रीय असंतुलन दूर करने हेतु विकास बोर्डों की व्यवस्था की गई है।
5. किस अनुच्छेद के अंतर्गत संसद का कानून राज्य विधानसभा की सहमति से लागू होता है?
अनुच्छेद 371A (नागालैंड) और 371G (मिजोरम) के अंतर्गत कुछ विषयों पर संसद का कानून राज्य विधानसभा की सहमति के बिना लागू नहीं होता।
6. हिल एरिया कमेटी (Hill Areas Committee) का प्रावधान किस राज्य में है?
मणिपुर में, अनुच्छेद 371C के अंतर्गत हिल एरिया कमेटी का प्रावधान है।
7. आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से संबंधित विशेष प्रावधान कौन-से हैं?
अनुच्छेद 371D और 371E आंध्र प्रदेश/तेलंगाना से संबंधित हैं, जिनमें स्थानीय आरक्षण और केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना का प्रावधान है।
8. सिक्किम से संबंधित विशेष प्रावधान कौन सा है?
अनुच्छेद 371F सिक्किम से संबंधित है, जो उसकी विधानसभा संरचना, पुराने कानूनों और भूमि अधिकारों की रक्षा करता है।
9. अरुणाचल प्रदेश में राज्यपाल को विशेष अधिकार किस अनुच्छेद के तहत मिले हैं?
अनुच्छेद 371H के तहत अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल को कानून-व्यवस्था पर विशेष विवेकाधीन शक्ति दी गई है।
10. गोवा से संबंधित विशेष प्रावधान क्या है?
अनुच्छेद 371I के अनुसार गोवा विधानसभा के सदस्यों की न्यूनतम संख्या 30 निर्धारित की गई है।
11. कर्नाटक से संबंधित नवीनतम विशेष प्रावधान कौन सा है?
अनुच्छेद 371J कर्नाटक के कल्याण-कर्नाटक (हैदराबाद-कर्नाटक) क्षेत्र से संबंधित है और यह सबसे नया विशेष प्रावधान है।
12. क्या ये विशेष प्रावधान संघीय ढांचे के विरुद्ध हैं?
नहीं। ये प्रावधान Asymmetrical Federalism को दर्शाते हैं और संघीय ढांचे को मजबूत करते हैं, कमजोर नहीं।
13. UPSC Prelims में इस अध्याय से कैसे प्रश्न पूछे जाते हैं?
Prelims में प्रायः:
- अनुच्छेद–राज्य मिलान
- “किस अनुच्छेद में क्या प्रावधान”
जैसे तथ्यात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं।
14. UPSC Mains में इस विषय का उपयोग कैसे होता है?
Mains में यह विषय:
- संघवाद
- क्षेत्रीय विविधता
- संवैधानिक लचीलापन
से जुड़े विश्लेषणात्मक उत्तरों में उपयोग होता है।
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